Friday, February 25, 2011

रक्कासा सी नाचे दिल्ली 14

दिल्ली तो खेवनहार मित्र तेरी नैया की, दे न दगा
दिल्ली की लुटिया डूब गयी तो किस की दुम पे झूलेगा
तू बेशक अन्तरिक्ष में उड़ ,पर कदम रहें इस धरती पर
वो सैरगाह हो सकती है ,पर घर ये ही होगा दिल्ली
हर पल तेरा पानीपत है,हर क्षण तेरा जैसे झाँसी
हर घडी तेरी कुरुक्षेत्र समझ,हर लम्हा तेरा है प्लासी
हिंसा-हत्या से लाल हुई रोती है भारत की माटी
तू झूम-झूम कर घाट-घाट,रक्कासा सी नाचे दिल्ली
तू नंगों की लज्जा से डर ,भूखों के दिल की आह न ले
बेकारों की जो फौज खड़ी उनके सपनों की भी सुधि ले
अपनी करनी के फल तुझको करते तो होंगे कुछ उदास
आखिर तू भी है दिल वाली , कुछ तो डरती होगी दिल्ली
दिल्ली तेरे देवालय में बुत बन कर है इतिहास खड़ा
ये जुगनू राह दिखायेंगे तेरा जो इन पर ध्यान पड़ा
राजा तो होते मिट्टी के ,मिट जाते हैं वो वक्त ढले
फानी दुनिया में रह जातीं कर्मों की गाथाएं दिल्ली

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