Monday, November 26, 2012

ऐसा पहले भी हो चुका है

अरविन्द केजरीवाल की "आम आदमी पार्टी"शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसका स्वागत यह कह कर किया कि  अब एक नया इतिहास रचा जा रहा है।कुछ लोगों ने यह भी कहा कि  पंद्रह सौ पार्टियों के देश में अब पंद्रह सौ एक पार्टिया हो गईं।
अब सब से दस-दस रूपये लिए जायेंगे। दस रूपये लेना कोई भ्रष्टाचार नहीं है। मोरारजी देसाई ने भी जनता से एक-एक रुपया लिया था। आम आदमी चुनाव लड़ेंगे। चुनाव लड़ना कोई गलत बात नहीं है। बीजेपी के अभ्युदय काल में संतों-पुजारियों-संन्यासियों ने भी चुनाव लड़े थे। अब देश के दो सौ पचास जिलों में लोगों ने पार्टी का दफ्तर बनाने के लिए अपने-अपने घर प्रस्तावित कर दिए। अच्छे काम के लिए अपने-अपने घर में जगह दे देना कोई गलत बात नहीं है। कांग्रेस के आरंभिक दिनों में भी मोती लाल नेहरु और ऐसे ही कई संपन्न लोगों ने अपनी मिलकियत देश के लिए दे देने की पेशकश की थी।पिछड़ों को साथ लेना कोई जुर्म नहीं है। मायावती और कांशीराम ने भी यह किया था।
दस रूपये, देश-सेवा के लिए दिया गया समय, गतिविधियों के लिए दी गई जगह,या पिछड़ों को सुविधाएं, बस केवल बीज की तरह इस्तेमाल न हों। दस रूपये देने वाले लोग कल रुपयों के पेड़ से धन झाड़ने न लगें,सेवा करने वाले बुलेट-प्रूफ एयर-कंडीशंड गाड़ियों में न घूमने लगें, दान दिए घरों को लोग पांच-सितारा होटलों,  और मालों में न बदलने लगें,तथा पिछड़े लोग समर्थ बनने के बाद अपनी ही जाति के लिए सब कुछ आरक्षित रखने की लालसा न रखें, इस के लिए शुभकामनायें।

3 comments:

  1. जिस देश मे गंगा बहती है वहाँ बहती गंगा मेन हाथ धोने वालों की कमी कैसे होगी। दशावतरण के बाद यह हाल है तो नेतावरन से क्या खास फर्क पड़ना है। आना जाना तो लगा रहेगा आम आदमी के नसीब मेन गुठलियाँ गिनना ही लिखा है। लेकिन आपका अंदाज़ अलग ही है

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  2. नतीजे समय के गर्भ में है...."आम आदमी पार्टी" जिस उम्मीद से बनी है वह पूरी करें..इसके लिए शुभकामनाएँ...|

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  3. Tumhen badhaai, tumne to apna parichay hi 'mangoman' kah kar diya tha. Tum unse apna copyright hak mango.

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