Sunday, November 18, 2012

आभासी दुनिया की विश्वसनीयता

कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं, कि  आभासी दुनिया में असलियत की जांच कैसे की जाए? हाँ, यह हो सकता है। शर्त यह है कि  आप के पास इन सवालों के स्पष्ट जवाब हों-
1,आपको यह मालूम हो कि  आप क्या चाहते हैं, और जो चाहते हैं, उसके बारे में बिना किसी हिचकिचाहट के अपने को आश्वस्त कर सकते हों।
2.आप ईमानदारी से आगे बढ़ रहे हों। यदि आपकी ईमानदारी संदिग्ध है, तो आपको मिलने वाले परिणामों को भी निरापद नहीं माना जा सकता।
3.आप अपनी वांछना पर कायम हों। हाँ, आप बार-बार बदलने की मानसिकता न रख रहे हों।
4.आपके पास सहनशीलता की एक पर्याप्त रेंज हो। मतलब, आप पाने की लालसा के साथ खोने की ज़िल्लत के लिए भी कुछ हद तक तैयार हों।
वाह, फिर फायदा ही क्या? यदि आभासी दुनिया में विचरना जुआ खेलने के सामान रिस्की है, तो इसकी विश्वसनीयता ही क्या? आप ठीक सोच रहे हैं।
लेकिन जब हम किसी रेस में दौड़ते हैं, तब उसका परिणाम केवल हमारे कार्य-निष्पादन पर ही निर्भर नहीं है। दूसरों का कार्य-निष्पादन भी परिणाम तय करता है। दूसरों के ख़राब खेलने में हमारी जीत है। इसे हम अलग-अलग नामों से जानते हैं। वास्तविक दुनिया में हम इसे "तकदीर" या भाग्य कहते हैं। संयोग भी कह देते हैं। नक्षत्रों की चाल भी।
आभासी दुनिया में भी ऐसी कुछ बातें आएँगी। लेकिन इन बातों के जवाब के रूप में आपके पास "आत्म-विश्वास" है।ठीक वैसे ही जैसे विपरीत हवा में किसी नाविक के पास दिशा मोड़ने के लिए पतवार होती है। इस पतवार का प्रयोग नाविक की शक्ति और बुद्धिमत्ता पर निर्भर है।पतवार की अपनी कोई स्वचालित शक्ति नहीं है।
इसे ऐसे समझिये। यदि आपसे आपकी कोई वस्तु खो गई,तो कई संभावनाएं हैं।
1.वह मिल जाए।
2.वह न मिले।
3.वह आपसे कुछ खर्च करवा कर मिले।
4.वह आपको कुछ ईनाम के साथ मिले [जैसे फिल्मों में होता है, खोया रुमाल लौटाने जो शख्स आता है, वही कालांतर में जीवन-साथी के रूप में आपको मिल जाता है]
अब इन सभी स्थितियों को आप सकारात्मक मानिए, क्योंकि आपने तो वस्तु खो ही दी थी।आभासी दुनिया ऐसी ही है।
    

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