Monday, November 19, 2012

एक ही चित्र के दो शीर्षक -हताशा और प्रेरणा

हाँ, यह दोनों शब्द एक दूसरे के विपरीत हैं।
प्रेरणा का अर्थ है, हमें कुछ उभरता हुआ दिखे। उगता हुआ। बढ़ता हुआ। हम उसके प्रति आशा और आकांक्षा से भर जाएँ। हम उसमें अपना हित खोजें। हमें अच्छा महसूस हो। हमारी जिज्ञासा और जीवंत हो जाए। हम उसके अनुसरण को प्रेरित हों। प्रोत्साहित महसूस करें। हम कृतज्ञ अनुभव करें।
हताशा में एक पस्ती है। धुंधलाता हुआ कुछ। मिटता हुआ सा। थके-थके हम। निराश। भयभीत। असफलता का अहसास।अनुत्तीर्णता की आशंका। विफलता का खौफ। बोझिलता।शाम का क्षितिज।
कल "मुंबई"बंद और उसके बाद शिवसेना सुप्रीमो की अंतिम यात्रा के दृश्य, अखबारों, टीवी चैनलों और अपनी वास्तविकता में इन दोनों शब्दों का मिला-जुला अहसास जगा रहे थे। यदि किसी शख्स के जीवन के बाद ऐसा दृश्य उपस्थित होता है, तो यह एक  पवित्र उपलब्धि है। यह एक अनिर्णीत असमंजस भी है।

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