Thursday, March 15, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट [ भाग 7 ]

     इस यात्रा में अपनी दो शुभचिंतक स्थानीय युवतियों के साथ होने से पूरा परिवार खुश था. वे सभी तरह के भय से मुक्त हो चुके थे और अब आपस में खुलकर बातें कर रहे थे. दोनों बच्चे कार की खुली खिड़की से मनोरम अमेरिकी दृश्यों का आनंद ले रहे थे.कार एक दिशा में भागी जा रही थी और रास्ता जैसे दूसरी दिशा में. कभी-कभी बादल बिलकुल सड़क पर चले आते और बच्चों को लगता कि ज़मीन आसमान में गहरी दोस्ती है.
     दोनों बहनों में मात्र चार मिनट का अंतर था, उनकी उम्र में. लेकिन छोटी बहन बड़ी को सम्मान देने में इन चार मिनटों का पूरा मोल चुका रही थी.ज़्यादातर बातें बड़ी बहन ही पूछ रही थी, जिस के दिल पर बच्चों पर बेवजह चिल्ला पड़ने का अपराध-बोध अभी तक हावी था.
     - आप सिमी को जानते हैं ? युवती ने बच्चों के पिता से पूछा तो वे एकाएक सकपका गए.
     छोटी बहन भी जिज्ञासा से इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए बच्चों के पिता का मुंह ताकने लगी. लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला.
     -सिमी ग्रेवाल...इंडियन और हॉलीवुड ऐक्ट्रेस, अब जैसे युवती ने और क्लू देने के लिए कहा.
     -ओह, हाँ.. हाँ...पर वो अब ज्यादा फेमस और सक्रिय नहीं है.यह सुन क़र दोनों ही युवतियों के चेहरे पर थोड़ी मायूसी आई.युवतियों ने उन्हें बताया कि वे भारत के बारे में केवल दो बातें ही जानती हैं. एक तो यह कि वहां पानी बहुत कम है, और दूसरे वहां सिमी ग्रेवाल रहती है, जिसकी एक फिल्म उन्होंने कभी पहले देखी है.
     बच्चों के पिता अब तपाक से बोल पड़े- पानी कम नहीं है, केवल देश का एक भाग ऐसा है जहाँ रेगिस्तान है. वहां बारिश नहीं होती, और चारों ओर रेत के बड़े-बड़े टीले हैं.वैसे तो भारत के तीन ओर समुद्र है, कई बड़ी नदियाँ भी हैं. चेरापूंजी में तो... बच्चों के पिता ने देश की साख बचाने के लिए जैसे अपने बचपन में पढ़ा भूगोल का सारा ज्ञान उंडेलना चाहा.
     इससे पहले कि युवतियां और कोई प्रतिक्रिया देतीं, बच्चों की माता ने पति को प्यास लगने का इशारा किया. संयोग से सर्विस क्षेत्र भी निकट आ रहा था. बीच में कॉफ़ी पीने के लिए गाड़ी को रोक लिया गया.
     सभी एक केफेटेरिया में दाखिल होने लगे. लड़के की माँ उसे शौचालय लेजाने के लिए पीछे रुक गईं. छोटी बच्ची ने इतना शानदार शोरुम देखा तो उसकी आँखों में भी कोई फरमाइश मचलने लगी.
     बातें भी चलती रहीं, और कॉफ़ी भी आकर बिलकुल ठंडी हो गई. लेकिन लड़के और उसकी माँ का इंतज़ार अभी भी था. अब बच्चों के पिता ने उठ के देखने का मन बनाया ही था कि बदहवास सी दौड़ती माँ एकाएक दाखिल हुईं. वह बुरी तरह घबराई हुई थीं, और बार-बार कह रहीं थीं कि बेटा न जाने कहाँ चला गया. सब चौंक पड़े. ऐसा कैसे हो सकता है ? शौचालय के दरवाजे पर माँ खड़ी रहे और बेटा भीतर से गायब हो जाये ? कोई और दूसरा दरवाज़ा भी तो नहीं था. दोनों युवतियां भी उनके साथ घबरा क़र देखने के लिए दौड़ीं...[ जारी...]      

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