Saturday, December 8, 2012

नव वर्ष के संकल्प [संशोधित]

कुछ दिन पहले मैंने ऐसे सात संकल्प बताये थे, जो इस वर्ष अपनाने के लिए मैं सोच रहा हूँ। मैंने आपसे इन पर आपकी राय भी मांगी थी। कुछ मित्रों ने मुझे अच्छे सुझाव दिए हैं।
एक सबसे आश्चर्य वाली बात यह है कि  मेरा केवल एक संभावित संकल्प ऐसा है जो किसी ने पसंद नहीं किया। मैंने वर्किंग लेडीज़ को ताज़ा भोजन उपलब्ध कराने की जो बात की थी, वह किसी को पसंद नहीं आई। थोड़ा और सोचने पर मुझे ही यह ख्याल अव्यावहारिक लगा। क्योंकि कमाने वाली महिलाएं किसी का अहसान  तो लेना नहीं चाहेंगी। वे अपने को दयनीय भी नहीं समझतीं। यदि यह भोजन पैसे लेकर खिलाया जाता है, तो यह व्यापार ही है, इसमें संकल्प कैसा?और यदि निशुल्क खिलाया जाता है तो इसका कारण किसी को भी समझ में नहीं आएगा। बल्कि एक संदिग्धता ही बनी रहेगी। इसलिए ये विचार मैंने छोड़ दिया।
अमेरिका से स्मार्ट इंडियन ने मुझे और भी कई अच्छे सुझाव दिए।
एक विचार यह भी है कि मैं स्थानीय ज़ू [चिड़ियाघर] में किसी एक पशु-पक्षी को रोज भोजन देने का कार्य करूँ। यह आसानी से संभव भी है।
कहते हैं कि नववर्ष का यह संकल्प अपने खुद के लिए लिया जाना चाहिए। इसके प्रचार की भी कोई ज़रुरत नहीं है। मैं जो इसकी चर्चा कर रहा हूँ उसका उद्देश्य प्रचार करना नहीं है, बल्कि अपने मित्रों को भी इसके लिए याद दिलाना ही मेरा मकसद है। हाँ, यदि कोई संकल्प अपने लिए ही लेना हो तो मैं चाहूँगा कि  इस वर्ष मैं कुछ चित्रकारी भी करूँ। इन चित्रों का फिर मैं क्या करूँगा, यह मुझे नहीं पता।
एक मन यह भी है कि  इस वर्ष मैं अपनी "आत्मकथा" लिखूं। लेकिन डरता हूँ, कि  कहीं यह झूठ बोलने का संकल्प तो नहीं है?अपने बारे में सच-सच लिखूं, तो उसमें किसी के लिए पढ़ने को है ही क्या?लेकिन फिर यह भी सोचता हूँ, कि  संकल्प तो अपने लिखने का लूँगा, दूसरों के लिए पढ़ने का थोड़े ही।वे पढ़ें, न पढ़ें, ये वे जानें।  

2 comments:

  1. बहुत खूब...नए साल पर हम भी कुछ संकल्प लेंगे...इसका संकल्प अभी लेते हैं..:)
    और आत्मकथा का इंतजार रहेगा....शुभकामनाएँ..|

    ReplyDelete
  2. chalo abhi tumhen dhanyawaad to de hi deta hoon, baad me na bhi likh paya to kshamaa maang loonga. Vaise bhi ye sankalp to maine nahin liya ki jo kahoonga, vah karoonga bhi.

    ReplyDelete

Some deserving ones for...No. 1

देश जल्दी ही एक नए राष्ट्रपति का नेतृत्व पाने को है। कहना पड़ता है कि राजनैतिक दलों का आपसी वैमनस्य और कटुता असहनीय होने की हद तक गिर चुके ह...

Lokpriy ...