Monday, December 31, 2012

संकल्प

समय किसी उफनती धारा के किनारे डगमगा रहा है। थोड़ी ही देर में मिट्टी  की तरह भरभरा कर बहते पानी में जा मिलेगा। मौजूदा साल आशीर्वाद देकर आगे बढ़ते किसी  संन्यासी की भाँति ओझल होकर चला जायेगा। इसकी जगह एक नया साल ले लेगा, ठीक वैसे ही, जैसे बासी सांस के मुंह से निकलते ही ताज़ी हवा फिर से नई  सांस बन कर जीवन की आस बढ़ा देती है।
मैंने नए साल का "संकल्प" ले लिया है।
मैं इस साल अपने हर दिन को पिछले बीते दिन पर श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश करूंगा। और हाँ, हर महीने कुछ ऐसे लोगों के साथ मिलकर थोड़ा समय ज़रूर गुज़ारूंगा,जो इस समय को बिता कर मन से खुश हों।
आप सभी को नव वर्ष की अनेकों मंगल कामनाएं!
"कल आपको एक चावल के दाने के बराबर ख़ुशी मिले। परसों दो दानों के बराबर। उस से अगले दिन चार दानों के बराबर। और उस से भी अगले दिन आठ दानों के बराबर। इसी तरह वर्ष- भर यह गणित चलती रहे।"  

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