Saturday, December 8, 2012

ये लड़ाई न जाने क्या गुल खिलाएगी?

आज एक खबर थी कि  अब "भ्रष्टाचार का मुकाबला विज्ञान करेगा"। अखबार ने यह तो नहीं लिखा कि  यह विज्ञान की भ्रष्टाचार पर चढ़ाई है, या भ्रष्टाचार का ही विज्ञान पर आक्रमण है, अभी तो केवल दोनों के झगड़े का ज़िक्र है।
विज्ञान यह सबूत के साथ पकड़ लेगा कि कौन किससे कहाँ कब कितनी रिश्वत ले रहा है। इसके लिए चप्पे -चप्पे पर प्रामाणिक कीमती वैज्ञानिक यन्त्र लगाए जायेंगे। उन यंत्रों को देख कर सही स्थिति पता लग जायेगी। स्थिति पता लगते ही कार्यवाही की जा सकेगी।
आहा !
वैज्ञानिक यन्त्र "खरीदे" जायेंगे? माने वही टेंडर,खरीद, कमेटी,सप्लाई आदि-आदि ?
"स्थिति" का पता लगाने के लिए "समिति"?
फिर "कार्यवाही"? माने वही आरोप,सज़ा,अपील,'क्लीन-चिट' आदि-आदि? 
पानी आ रहा है। 
कहाँ?
विज्ञान की आँखों में,और भ्रष्टाचार के मुंह में !       

4 comments:

  1. वाह.....
    सही कहा...
    ये तो एक चक्कर है....गश खा कर गिरती जनता है ...

    सादर
    अनु

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  2. Anuji, girti janta ke saath aap-ham ko rahna hai. Dhanyawaad.

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  3. सही...रोचक भी और एक सच्चाई भी..

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  4. Dhanyawaad. aur mujhe lagta hai ki logon ka ab is par dhyaan aur zyada jaayega ki hamen vaigyanik uplabdhiyon ko in kaamon me lagana pad rah raha hai.

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