Friday, December 7, 2012

डिसीज़न मेकिंग-एक अभ्यास

कल जब मैंने अपनी मेल चैक की, तो मुझे एक मित्र का सन्देश मिला।
मित्र ने कुछ साल पहले भारत से अमेरिका जाकर एक नौकरी ज्वाइन की थी। वे प्रतिभाशाली, मिलनसार और प्रगतिशील महिला हैं, इसलिए उनके जाते समय केवल यही विचार मन में आया था  कि  वे जहाँ भी रहेंगी, अपने कैरियर और जीवन के लिए सकारात्मक होकर रहेंगी, और सफल तो रहेंगी ही। ऐसा हुआ भी, उनके समाचार मिलते रहे।
अब अचानक उन्होंने बताया कि  पिछले दिनों उन्हें भारत में नौकरी के अच्छे प्रस्ताव मिले हैं, और वे निर्णय लेने से पहले मित्रों, शुभचिंतकों, परिजनों और सहकर्मियों के विचार जानना चाहती हैं।
कुछ लोग उन्हें अपना देश, अपने लोग, अपने रीति-रिवाज़ का हवाला देकर लौटने की सलाह दे रहे थे। वहीँ कुछ लोग उन्हें बेहतर कैरियर,अच्छी भौतिक सुविधाओं तथा प्रतिष्ठित उपलब्धि के नाम पर वहीँ बने रहने की सलाह दे रहे थे।
आइये, उनके निर्णय में उनकी मदद करें।
हम जीवन में क्या चाहते हैं? वैसे प्रश्न मुश्किल है, पर फिर भी-
1.निरंतर आगे बढ़ने की सम्भावना।
2.पर्याप्त सुख-सुविधाएँ।
3.अपने परिजनों के साथ अपने रीति-रिवाजों के साथ जीवन-यापन।
ये तीनों ही सुविधाएँ उन्हें "दोनों" जगहों पर मिल सकती हैं। केवल देखने की बात यह है कि  ये कहाँ कैसे मिलेंगी? इनके बदले में जो कुछ उन्हें छोड़ना होगा, उसके लिए उनका "ज़मीर" उनका कैसा सहयोगी सिद्ध होगा, यह विचारणीय है। अन्यथा जैसे हमारा देश-वैसे ही हमारी वसुधा।

4 comments:

  1. अपना देश तो अपना देश ही होता है

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  2. Aapki baat achchhi hai, fir bhi jab tak kuchh log ek-doosre desh me jaakar rahenge nahin, tab tak sanskritiyan paas kaise aayengi?

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  3. हम कितना भी कहें,आखिरी फैसला उनका ही होगा...फिर भी इंडिया सही है,ऐसा मै सोचता हूँ.. :)

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  4. Bahut achchha. Vaise desh hamaare dil me hote hain, ham vahan rah kar India ke aur yahan rah kar bhi Amerika ke ho sakte hain.

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