Sunday, October 21, 2012

सगी मौसी हूँ, कोई सौतेली माँ नहीं !

सैफ करीना की शादी भी हो गई। सबको आनंद आया, केवल दो लोगों को छोड़ कर। एक तो वो काजी जी, जिन्हें ये मलाल रहा कि  करीना ने शादी से पहले इस्लाम नहीं कबूला। दूसरा वो मीडिया, जिसे ये अचम्भा रहा कि शादी में मौसी जी नहीं आईं !
काजी जी की चिंता जायज़ है, बरसों पहले जब करीना की सासू माँ नवाबाइन बनीं थीं, तब वे भी "आयशा सुल्ताना" बन गई थीं। खैर,उनकी बात अलग हैं, उनका स्वभाव काफी शर्मीला था।
पर शादी में करीने से मौसी जी को तो आना चाहिए था। वे केवल मौसी ही नहीं हैं, बल्कि उनके ताल्लुकात सारे खानदान से हैं।
वे दुल्हन की माँ  को तब उपहार दे चुकी थीं, जब दुल्हन पैदा भी नहीं हुई थी। जब करीना की मम्मी बबीता  ने फिल्मों में कदम रखा, तो उन्हें मौसी जी की छोटी बहन होने का खूब सहारा मिला। बल्कि मौसी जी ने अपने जोड़ीदार दो-तीन हिट हीरोज़, राजेंद्र कुमार, संजय खान और मनोज कुमार जैसे, उन्हें तोहफे में दे दिए। दूल्हे की माँ  की वे फिल्म 'वक्त' में जेठानी बनीं। अपना देवर उन्हें देकर मौसी जी ने उन्हें अपनी साइड हीरोइन भी बनाया। इतना ही नहीं, दुल्हन के बाबा से उन्होंने 'दूल्हा-दुल्हन' का खेल खेला, मझले बाबा को 'बदतमीज़-राजकुमार' कहा, छोटे बाबा को 'प्रेम- पत्र' लिखे।ऐसे में, शादी में तो उन्हें आना ही चाहिए था।
हाँ, ये हो सकता है कि वे आईं हों, पर कैमरे की निगाह उन पर न गई हो! क्योंकि अब इस उम्र में वे कोई "साधना-कट" बाल तो बना कर आई नहीं होंगी!

2 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २३/१०/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

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