Sunday, October 23, 2011

तेल तो दिखा पर तेल की धार नहीं दिखी

राजस्थान का बाढ़मेर  जिला भारत और पाकिस्तान की सीमा का बड़ा भाग बनाता है. रेगिस्तान तो यह है ही. कुछ समय पहले इस क्षेत्र में भारी मात्रा में तेल होने का पता चला था. प्रधानमंत्री ने यहाँ एक टर्मिनल का उदघाटन किया और एक प्रसिद्द कंपनी के माध्यम से तेल निकलना शुरू हो गया.राज्य सरकार को काफी रायल्टी भी मिली.
लेकिन कुछ समय के बाद इतना तेल देख कर एक मंत्रीजी चिकने हो गए. उन पर से देश सेवा की भावना फिसल कर मिट्टी में मिल गई.उन्होंने उसी तेल में कम्पनी को भी तल दिया.
ज़मीन के ऊपर उदघाटन- भाषण चलते रहे, ज़मीन के भीतर से तेल रिस कर जेबों में पहुँचता रहा. भारत-पाकिस्तान की सीमा तो ज़मीन के ऊपर थी, धरती के गर्भ में तो सब मौसेरे भाई थे. 
ख़ुशी की बात यह है कि देश की कुंडली में कुछ नक्षत्र टेढ़ी चाल वाले हैं तो कुछ सीधी चाल वाले भी हैं. 
 महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को पत्र भेज कर मामले में दखल देने और आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है. 
तेल-पेट्रोल महंगा है, पर खूब है. अब देखना यह है कि जैसे ज़मीन खोद कर तेल निकाला जा रहा था, वैसे ही सच्चाई खोद कर तेल की धार कब निकाली जाती है?    

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