Friday, October 21, 2011

टैरी थोम्प्सन के शेरों ने गद्दाफी से बोलना क्यों नहीं सीखा ?

भाषा वास्तव में बहुत अहम है.बोलना आना चाहिए. कहते हैं कि जिसे बोलना आता है वह बाज़ार में खड़े होकर मिट्टी भी बेच देता है.और जिसे बोलना नहीं आता, उसकी दुकान पर सोना भी बिना बिका रखा  रहता है.कीमत सोने या मिट्टी की नहीं है, वाचालता की है. 
अमेरिका के ओहायो नगर में जब टैरी थॉम्पसन ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने से पहले अपने पालतू पशुओं को आज़ाद किया होगा, तब उसके चेहरे पर संतोष का वही भाव आया होगा, जो किसी पिंजरे से परिंदों को आज़ाद करके हवा में छोड़ते वक्त किसी इंसान के चेहरे पर आ सकता है. उसने सोचा होगा कि जब उसे भवसागर से मुक्ति मिल रही है तो वह क्यों किसी को बंधन में जकड़ कर रखे? लेकिन उन पशुओं में से कुछ कर्नल गद्दाफी की फितरत के थे. शायद इसीलिए उन्हें गोली का निशाना बनना पड़ा. और उन्हीं के साथ कुछ वे भी मारे गए जो शायद उतने खतरनाक नहीं थे. लेकिन एक बात है. ये बेजुबान जानवर शायद लीबिया के स्वयं-भू सुलतान जैसी किस्मत वाले नहीं थे, जो अपने आखिरी वक्त में कर्नल की तरह "डोंट शूट" की गुहार लगा कर कम से कम अपने जीवन के लिए एक आखिरी अपील तो कर सकें. इसलिए निर्विरोध मारे  गए.
जीवन-दान तो कर्नल गद्दाफी को भी नहीं मिला, लेकिन उसे भाषा-ज्ञान के चलते अपने क़त्ल करने वालों को कम से कम एक बार मन से कमज़ोर करने का मौका तो ज़रूर मिला. 
गद्दाफी और शेरों की तुलना इसलिए नहीं की जा रही कि दोनों एक से स्वभाव के थे. शेर तो इसलिए नरभक्षी थे क्योंकि उन्हें पशु-जीवन मिला था.पर गद्दाफी को मानव जीवन मिला था. फिर भी दोनों ने अंत एक सा पाया. 
और अंत भी एक सा कहाँ पाया? शेरों की मौत पर तो दुनिया भर से सहानुभूति की लहर आ रही है. गद्दाफी की मौत को धरती को मिले एक सुकून की तरह देखा जा रहा है. आतंक को खेल समझने वाले इससे कोई सबक ले पाते तो एक उपकार और होता धरती पर.      

2 comments:

  1. @शेरों ने गद्दाफी से बोलना क्यों नहीं सीखा ?
    क्योंकि शेर चूहों से नहीं सीखते। सारी ज़िन्दगी इंसानों की ज़िन्दगी से खेलने वाले आततायी, आतंकी, तानाशाह अपनी ज़िन्दगी बचाने के लिये इसी तरह चूहों की तरह गटर के पाइपों में छिपते फिरते हैं, फिर भी ... फिर भी मानवीय भावनाओं का, जीवन का मूल्य नहीं समझ पाते हैं ... अफ़सोस!

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  2. "sher choohon se nahin seekhte." is ek vaky me darshan bhi hai manovigyan bhi, itihaas bhi hai vartmaan bhi. aabhaar.

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