Saturday, May 10, 2014

"टू लेट"

खबर है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री ने अपने बंगले में  पैकिंग शुरु करवा दी है। उन्हें मिले तोहफ़े और अन्य ज़रूरी सामान समेटा  जाने लगा है।
इतना ही नहीं,आज तो उन्होंने कुछ बड़े और महत्वपूर्ण विश्वनेताओं को अपनी विदाई के पत्र भी भेजने शुरु कर दिए जिनमें उनसे मिले सहयोग के लिये आभार जताया गया है।
वैसे ये समय प्रधानमंत्री के लिये घूम-घूम कर देश की जनता को ये बताने का था कि उन्होंने पिछ्ले दस सालों में देश के लिये क्या किया, कैसे किया, क्यों किया, और आगे उनकी पार्टी यदि सत्ता में आती है तो क्या करेगी।
लेकिन इसकी ज़रूरत उन्हें नहीं पड़ी क्योंकि देश की जनता उनसे न कुछ पूछ रही है और न उनसे कुछ जानना चाहती है।
जनता की दिलचस्पी तो उनकी जगह आने वाले से यह जानने की है कि उसके तरकश में कितने तीर हैं? और इसके लिए पूरे देश की जनता परीक्षक बन कर उसका कड़ा इम्तहान लेने में जुटी है।
सत्ताधारी पार्टी का कोई नेता न तो पैकिंग में मदद कराने प्रधान मंत्री के घर जा रहा है और न ही शिष्टाचार भेँट के लिये उधर का रुख़ कर रहा है। उलटे सत्ताधारी दल का शीर्ष नेतृत्व तो ऐसा जता रहा है,मानो उनका कोई किरायेदार घर ख़ाली कर रहा है और उन्हें नया किरायेदार ढूँढना है।
प्रधान मंत्री अगर रिज़र्व बैंक से रिटायर हुए होते तो कम से कम अफसरों की एक शानदार फेयरवेल पार्टी तो ज़रुर हुई होती।           

2 comments:

  1. नेहरू गांधी खानदान के अलावा कोई भी मंत्री आये कांग्रेस का यही रवैया होता है पार्टी के नेता भी इतने नमकहराम व कृतघ्न हैं जिसकी कोई सीमा नहीं उसकी उपलब्धियों को ये चापलूस नेता हज़म ही नहीं कर पाते और इस खंडन का नेता प्रधान मंत्री पद से कभी रिटायर होता नहीं भगवन ही उन्हें इस उतरदाइत्व से मुक्त करता है उनकी गलतियों पर भी कशीदे पढ़ना लेकिन अन्य की उपलब्ध्यों को दरकिनार करना कांग्रेस के डी एन ए में शामिल है

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  2. Aabhaar,jab ham sab khul kar apne vichar dene lagenge, to badlaav zaroor aayega .

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