Wednesday, May 21, 2014

अब ठीक है

"देश की पहली महिला आई पी एस" अधिकारी होना कोई ऐसी घटना नहीं है, जिसे इतिहास चुपचाप दर्ज़ कर ले।  फिर महिला भी ऐसी कि जिसने अपनी हर पोस्टिंग पर छाप छोड़ी हो।  मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि किरण बेदी अपने कैरियर में अभी पूरी नहीं हो गई हैं।
अब खबर है कि वे राजनीति में सक्रिय होकर दिल्ली के भावी-मुख्यमंत्री की दौड़ में ज़ोर-आजमाइश के लिए तैयार हो गई हैं।  यह अच्छा कदम है।
भारत जिस भविष्य की देहलीज़ पर आ खड़ा हुआ है, वहां केवल झाड़ू की नहीं, सफ़ाई की नीयत अहम है, किरणजी ने अपनी हर तैनाती पर दिखाया है कि वे केवल कुशल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बेहतर देश की तलबगार भी हैं। वे ऐसी दिल्ली बनायें, जहाँ खड़े होकर मोदीजी भारत का परचम सारी दुनिया में लहरा दें, शुभकामनाएं !    

6 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (23.05.2014) को "धरती की गुहार अम्बर से " (चर्चा अंक-1621)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

    ReplyDelete
  2. प्रबोध जी, विषय जटिल है बात लंबी है, टिप्पणी बक्से में नहीं समाएगी। अभी के लिए इतना ही अनुरोध है कि इस संस्तुति पर मेरी कड़ी असहमति दर्ज़ की जाये।

    ReplyDelete
  3. Ap donon ka aabhaar.Anurag ji aapne meri utsukta badha dee hai, kisi tarah poori baat mujh tak pahunchaiye !

    ReplyDelete
  4. अपने-अपने विचार---

    ReplyDelete
  5. Kripya aapke vichar bhi bataayen, vicharon ki bahurangi jhalak ka swagat hai?

    ReplyDelete
  6. शुभकामनाएँ! केजरीवाल जी की विदूषकता ने मन खिन्न कर दिया है अब किसी से उम्मीद रखना बेईमानी लगता है

    ReplyDelete

प्राथमिक उपचार है तुष्टिकरण

यदि दो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों और उनमें से एक अपने को कमज़ोर पा कर रो पड़े तो हम उनमें फिर से बराबरी की भावना जगाने के लिए एक का तात्कालिक ...

Lokpriy ...