Sunday, May 18, 2014

मेरा नाम

बाजार में बहुत भीड़ थी।  कहीं तिल रखने की जगह नहीं।  लेकिन उस कॉलोनी में जाने का कोई और रास्ता भी तो नहीं था।  लिहाज़ा रेलम-पेल के बावजूद वहीँ से जाना था।  रास्ते में इतने सारे वाहन,इतने सारे लोग, तरह-तरह के कामों से आते- जाते, अलग-अलग समस्याओं के भंवर में घिरे।
मुझे यह सोच कर बेहद आश्चर्य हो रहा था कि हम में से किसी के पास जन्म लेते समय यह चॉइस नहीं होती कि  हम अपनी पसंद का देश- नगर, पसंद की जाति-धर्म,या पसंद के माता-पिता ही चुनलें, सब कुछ कितना अनिश्चित और स्वाभाविक-सहज होता है और फिर भी आते ही हम जोर-शोर से भिड़ जाते हैं, न जाने क्या करने में?
खैर, ऊटपटाँग सोचने का लाभ ये हुआ कि उनकी गली आ गई।  ढेर सारे ऊंचे-ऊंचे मकान, एक-एक मंज़िल पे दर्जनों घर।
फिर उनका घर भी आ गया, और ड्राइंगरूम में आमने-सामने मैं और वे भी।  बातें होने लगीं।
अब मैं बता दूँ, कि मैं इतनी उथल-पुथल को खंगालता हुआ उनके पास क्यों आया था? केवल इसलिए, कि इस महानगर में लाखों की भीड़ में सही और शुद्ध भाषा पर ध्यान देने वाले लोग इक्का-दुक्का ही थे।  कुछ दिन पहले ही शहर के एक लोकप्रिय टीवी चैनल ने ऐलान किया था कि वह अब दर्शकों की पसंद के लिहाज से नंबर एक बन गया है।  मैं उनसे यह अनुरोध करने गया था कि वे अब उस चैनल से सही-शुद्ध-सटीक भाषा लिखने- बोलने का आग्रह भी करें, क्योंकि वे वहां जाते रहते हैं।
सारी बात सुन कर वे बोले- "अजी, कौन ध्यान देता है,पिछले हफ्ते तो उन्होंने मेरा ही नाम गलत दिखा दिया था।"
उनकी बात में दम था।  लौटते समय मैं सोच रहा था कि जाने दो, यदि मेरा जन्म ही, स्पेन,केलिफोर्निया या डेनमार्क में हो जाता तो मैं क्या कर लेता?       
     

2 comments:

  1. After reading the blog I am remembering famous movie of Hrishikesh Da,"Anand"where hero Rajesh Khanna speaks-"Kash,hum jaise dost chun te hain vese hi rishtedaar be chun sakte..". You have the rights to choose your friends at your will,you may choose a region,place and even nation to live but the Almighty has kept the rights to give you parents and consequently relatives at His will.. perhaps to keep balance in the society..

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