Tuesday, September 27, 2011

देश की मदद नहीं करोगे बच्चो?

बच्चो, तुम आर्यभट्ट के देश में पैदा हुए हो. अबुल-फज़ल तुम्हारे पूर्वज हैं. एक से बढ़कर एक गणितज्ञ  अपने देश में हुए हैं, उनका स्मरण करो. आज देश के सामने एक बड़ी चुनौती है. आज तुम्हारे पास तरह-तरह के कंप्यूटर और कैलकुलेटर हैं. उनका सहारा लो, और देश की जिज्ञासा शांत करो. 
यह मत सोचो कि केवल लोकपाल ही देश हित में सोचते हैं. राज्यपाल भी देश की चिंता में दुबले होते हैं. आज एक राजभवन तुमसे मदद चाहता है. छोटे-छोटे दो सवाल तुम्हे हल करने हैं. कैसे भी दो, पर इनका उत्तर दो. यह देश की प्रतिष्ठा का सवाल है. 
हिसाब जानते हो न ? 
तो फ़टाफ़ट हिसाब लगा कर बताओ कि अगर गुजरात में  कुछ लाख लोग कुछ दिन खाना न खाएं तो कितना "खर्चा" आएगा ? 
दूसरा सवाल- यदि दिल्ली में  कुछ लोग कुछ करोड़ -अरब रुपया खा जाएँ तो देश को कितनी "बचत" होगी. 
राजभवन का फोन नंबर है ? तुम सीधे भी अपना उत्तर वहां बता सकते हो,वो क्या है न, राजभवन को थोड़ी जल्दी है. 

1 comment:

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