Wednesday, February 6, 2013

ज़ीनत अमान- वो पहले दुनिया की थी, फिर एशिया की, और तब भारत की बनी।

दिल्ली दुष्कर्म मामले के बाद सारा देश, सरकार, अदालतें और जनता दुष्कर्म करने वालों को जो सज़ा देने की मांग उठा रहे हैं, वह सज़ा उन्होंने फिल्म "इन्साफ का तराजू" में अपनी छोटी बहन के साथ दुष्कर्म करने वाले पापी को आज से पैंतीस साल पहले ही दे डाली थी।
जब देश से पढ़-लिख कर आजीविका के लिए हमारे नौनिहाल विदेशों में जा रहे थे, तब विदेश में पढ़ कर और "मिस एशिया" का खिताब जीत कर वह फिल्मों में आजीविका के लिए भारत चली आईं।
जब हमारी युवा पीढ़ी भारतीय धर्म-संस्कृति को बिसरा कर पाश्चात्य रंग में रंग रही थी, तब अपनी शुरूआती फिल्म से ही उन्होंने दुनिया-भर को "हरे रामा हरे कृष्णा"कहना सिखाया।
जो देवानंद अपनी हर फिल्म में नई तारिका को लाने के लिए ख्यात थे, उनके साथ उन्होंने बारह फ़िल्में कीं।
जब किसी बड़े और सफल फिल्मकार ने अपना कोई महत्वाकांक्षी भव्य प्रोजेक्ट शुरू किया, उसे नायिका के रूप में ज़ीनत अमान  ही याद आईं, चाहे 'सत्यम शिवम् सुन्दरम' में राज कपूर हों, चाहें 'रोटी कपड़ा और मकान' में मनोज कुमार,'शालीमार' में कृष्णा शाह हों, 'अब्दुल्ला' में संजय खान हों, 'कुर्बानी' में फ़िरोज़ खान हों,'प्यास' में ओ पी रल्हन हों या फिर डॉन ,लावारिस,अली बाबा और चालीस चोर, हम किसी से कम नहीं, अजनबी,धुंध जैसी बड़ी फ़िल्में। मजहर खान से उन्होंने विवाह किया, किन्तु मजहर के जाने के बाद अपने दो सुपुत्रों की परवरिश उन्हें अकेले ही करनी पड़ी।
साठ साल की आयु पूरी कर चुकीं ज़ीनत अब फिर से विवाह कर रही हैं। उनके दोनों युवा पुत्रों ने भी उनके इस कदम को सराहते हुए सहमति दे दी है।यद्यपि उन्होंने अभी अपने होने वाले जीवन-साथी के नाम का खुलासा नहीं किया है, पर वह जो भी हो, बेजोड़ होगा। शुभकामनायें !  
     

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