Tuesday, February 19, 2013

ये संकल्प नववर्ष की पूर्व संध्या पर लिया था

तीन मार्च की शाम पांच लोगों को बुलाया है मैंने। अभी मुझे ये तो नहीं पता कि  उनमें से कितने लोग आयेंगे, लेकिन जितने भी आयेंगे, हम शाम का खाना साथ-साथ खाएंगे। मैं ये जानता हूँ कि  उनमें से दो कई साल पहले के रिटायर्ड हैं और कहीं आते-जाते नहीं। उनके न आने जाने का कारण केवल यही है कि  वे अकेले आ-जा नहीं सकते, और कोई उनके साथ आने-जाने वाला नहीं है।
दो युवक हैं, वे आ जायेंगे और उन वरिष्ठ मेहमानों की मेजबानी में मेरी मदद करेंगे, यद्यपि मैं उन्हें जानता नहीं। पांचवां कौन है, यह बताना ज़रा मुश्किल है, क्योंकि उसे केवल निमंत्रण भेजा गया है। न तो उसे निमंत्रण मिल जाने की सूचना मिली है और न  ही उसका कोई जवाब। पर निमंत्रण इतने नाटकीय तरीके से भेजा गया है कि  उसके आने की सम्भावना शत-प्रतिशत है।
भानमती का ये कुनबा कैसे जुड़ेगा और जुड़ गया तो क्या करेगा, ये आपको चार मार्च को ही पता चल पायेगा।  

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