Sunday, February 19, 2012

पिट्सबर्ग, अमेरिका से हिमालय पर बैठे शिव को शिवरात्रि पर भेजा गया नमन

जिस समय शिवरात्रि का सवेरा भारत में दस्तक दे रहा था, भगवान शिव के दरबार में बधाइयों का ताँता लग चुका था.भारत के जो लोग अपने बच्चों के कैरियर में यह कह कर बाधा बनते हैं कि दूर जा कर बच्चे अपने घर-संस्कृति को भूल जायेंगे, उनमें से अधिकांश शायद शिवरात्रि की 'छुट्टी' के प्रमाद में अभी अपने दैनिक क्रिया-कलापों में ही उलझे हुए होंगे कि शिवरात्रि दुनिया-जहान में शुरू हो गई.शिव सबका मंगल करें.
कल रात को ज़ी-टीवी पर 'डांस इंडिया डांस' कार्यक्रम में एक से एक आधुनिक नृत्य कला पारंगतों ने भी अपने तमाम अधुनातन प्रयोग छोड़ कर पौराणिक कथानकों को ही अपने डांस में जीवंत किया. सोनल मानसिंह वहां अतिथि के रूप में मौजूद थीं. उस कार्यक्रम को देख कर मुझे ऐसा लग रहा था कि हमारी नई पीढ़ी ने दुनिया को बहुत अच्छी तरह से अपने कन्धों पर उठा लिया है. अब हम जैसे लोगों को सारी चिंताएं छोड़ कर केवल नई पीढ़ी के करतबों-कारनामों को देखना चाहिए.
कभी-कभी यह जिज्ञासा होती है कि जब सभी इंसानों और देवी-देवताओं का जन्मदिन होता है तो केवल शिव की ही "रात्रि" क्यों होती है? शायद इसीलिए, कि शिव से जुड़ा उल्लास भिनसारे, पौ फटने से पहले ही शुरू हो जाता है, इसलिए.   

4 comments:

  1. बम बम भोले - महादेव | आपको भी शिवरात्री की बधाईयाँ

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  2. dhanywad.ye pawan parv ham sabke liye uplabdhiyon ke dwar khole.

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  3. Prabodh Kumar ji aap jo kuch likhte hain sankshep me likhte hain aur bahut sateek sarthak likhte hain is liye aapke blog par aana achcha lagta hai.shivratri ki aapko badhaaiyan.

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  4. प्रबोध जी, आपको भी शिवरात्रि की बधाई! जब आप यह पोस्ट लिख रहे थे शायद उसी समय हम लोग यहाँ बैठे बरेली की शिवरात्रियों की यादें शेयर कर रहे थे। आभार!

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