Thursday, July 14, 2011

indradhanush phone ka

अत्यधिक उत्साह से उसका फोन आया- मुझे महादेवी वर्मा बहुत पसंद हैं, पर उन्हें "छायावादी" क्यों कहते हैं? आप अपने भाषण में इस पर भी प्रकाश डालना. मैं उसके उत्साह को बनाये रखना चाहता था, इसलिए मैंने सहमति दे दी.कुछ ही देर बाद फोन फिर बजा. वह बोला- क्या आपके पास राजर्षि टंडन की जीवनी है? मेरे मना करने पर उसने जानना चाहा कि क्या वह मुंबई में कहीं मिल जाएगी? वह चाहता था कि मैं वह किताब उसके क्षेत्रीय प्रबंधक को भेंट करूँ.
एक घंटे बाद वह मुझसे पूछ रहा था कि क्या मैं अपने साथ हिंदी की सभी पत्र-पत्रिकाओं की सूची ला सकता हूँ? वह अबतक मुझसे एक घनिष्ठ मित्र की भांति खुल चुका था और मुझे सलाह दे रहा था कि मैं अपने सुनने वालों को 'प्रवीण' 'प्रबोध' और 'प्राग्य' परीक्षाओं के बारे में बताऊँ, क्योंकि वे सभी दक्षिण भारतीय हैं. अपने अगले फोन में उसने मुझे जानकारी दी कि ठीक साढ़े-तीन बजे मुझे लेने कार आ जाएगी, मैं तैयार रहूँ. उसे इस बात का शायद अहसास हो गया था कि रात काफी हो चुकी,  इसलिए अगला फोन उसने काफी संक्षिप्त किया.उसने फरमाइश की कि मैं वहां अपनी कविताओं के साथ महाकवि निराला की कुछ रचनाओं का पाठ भी करूँ. 

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