Thursday, July 28, 2011

वैसे बुराई क्या है घोटालों में?

एक चुनाव आएगा. लोग साम-दाम-दंड-भेद से उसे जीतेंगें. एक सरकार बनेगी. वह तरह-तरह के "करों" से जनता से पैसा वसूलेगी. लोक-लुभावन योजनायें बना कर उस पैसे से पूरी की जाएँगी. बीच में छोटे से लेकर बड़े तक बहती गंगा में हाथ धोयेंगे. कभी-कभी मछलियों में कोई शार्क या व्हेल आ जाएगी, और गंगा पी जाएगी. थोड़े दिन हल्ला मचेगा, फिर सब शांत. 
आइये, आज इन शार्क या व्हेलों पर बात करें. क्या ये सब हाथ-पैर बाँध कर जेल में डाल देने लायक ही हैं? 
जी नहीं, इनमे सब तरह का स्टफ़ है. जीनियस भी हैं. पैसा खाने के साथ-साथ और कई क्षमताओं वाले लोग भी हैं. कई लोगों ने पैसा इसलिए चाट लिया, क्योंकि हमारे संविधान और कानून ने उस पर शहद लगा रखा था.कई लोगों ने सरकारी तिजोरियां इसलिए साफ़ कर डालीं, क्योंकि उन्हें सरकार में घुसाते वक्त कुछ लोगों ने उनकी जेबें साफ़ कर डालीं थीं. खैर, किसी भी नाजायज़ तरीके को सही ठहराना हमारा अभीष्ट नहीं है. न ही किसी 'गलत' का बचाव करना. हम केवल यह कह रहे हैं कि घोटाले इसलिए हुए चले जा रहे हैं, क्योंकि इनसे देश को कोई बड़ा नुक्सान नहीं हो रहा. जिन लोगों ने अरबों-खरबों हज़म कर लिए, वे न तो नोटों को खायेंगे और न इन्हें ओढेंगे-बिछायेंगे.केवल इधर-उधर छिपाएंगे, और पहरुओं के तितर-बितर हो जाने के बाद इन्हें उन्हीं कामों में लेंगे, जिनमे सरकार लेती. फर्क केवल यह है कि इनसे बनी मिल्कियत सरकारी न होकर 'निजी' होगी. निजी क्षेत्र ने सारे काम बुरे नहीं किये. और,और,और सरकार ने सारे काम अच्छे नहीं किये.    

2 comments:

  1. bahut achcha vyang kiya hai.jab manav mastish ek sahansheelta ki seema ko paar kar jaata hai to use koi dard mahsoos hona band ho jaata hai lagta hai hum logon ki is desh me vahi avastha aane vaali hai.

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  2. aapki baat sahi hai, is desh me ab sahansheelta jeene kee anivary shart banti ja rahi hai.

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