Wednesday, July 27, 2011

अक्षरों के बदले सितारे लौटाने का सुख यूरोप का शगल है

सुबह भूले-बिसरे फ़िल्मी गीत आ रहे थे. नायिका गा रही थी- "कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन".दूसरे ही गीत ने जवाब दे डाला- "बड़े नासमझ हो,ये क्या चाहते हो". लेकिन यह सच है कि "लौटाने"का भी अपना सुख है. 
मैं जब भी कोई किताब पढ़ा करता था, तो उसके लेखक को अपनी 'प्रतिक्रिया' ज़रूर लौटाया करता था. लेकिन यहाँ अपनी एक कमजोरी भी आपको बता दूं ,मैं केवल अनजान लेखकों को ही प्रतिक्रिया देता था. अपने मित्रों और परिचित साहित्यकारों को मैंने प्रतिक्रिया कभी नहीं दी. मैं डरता था कि कहीं मैं इस तरह उनकी मित्रता या कृपा-पात्रता खो न दूं. आज उन लोगों को भी कुछ लौटाने का मन कर रहा है. ये सब वही लोग हैं, जिनसे मैं मिलता रहा, पर इनके 'लेखन' पर मौन रहा. इनमे से कई तो अब जीवित भी नहीं हैं. ऐसे में प्रतिक्रिया, यदि शब्दों में न देकर सितारों में दी जाये तो शायद ज्यादा कारगर होगा.वैसे ये रिवाज़ पश्चिम का है, पर अब पूरब- पश्चिम- उत्तर- दक्षिण में अंतर ही कहाँ है?तो मेरा साथ दीजिये, और मेरे इन वरिष्ठ और मित्र साहित्यकारों के लिए तालियाँ बजाइए. 
*फज़ल इमाम मल्लिक, आत्माराम, राम मनोहर त्रिपाठी, सतीश दुबे, हृदयेश, सत्य नारायण मिश्र, अमर सिंह वधान, भैरू लाल गर्ग, तेजेंद्र शर्मा, दामोदर खडसे, विश्वनाथ सचदेव,कुंदन सिंह परिहार, सुमन सरीन, रमेश बत्रा, अरविन्द, बलराम, वेदव्यास,नन्द भारद्वाज, सावित्री परमार, विनोद तिवारी, अवध नारायण मुद्गल, सुदीप, शुभा वर्मा, सुधा अरोरा, सविता बजाज, जीतेंद्र भाटिया, उमा शंकर मिश्र. 
* *शेरजंग गर्ग, पद्मा सचदेव, राजेंद्र गौतम, उर्मि कृष्ण,निदा फाजली, राजेंद्र अवस्थी, महाराज कृष्ण जैन, यादवेन्द्र शर्मा'चन्द्र', कन्हैयालाल नंदन,ज्ञान प्रकाश विवेक, मधुकांत, बालशौरि रेड्डी, जगदम्बा प्रसाद दीक्षित, सीताकांत महापात्र, 
* * *हरिशंकर परसाई,मृणाल पाण्डे,शरद जोशी, धीरेन्द्र अस्थाना, सूर्यबाला, मेहरुन्निसा परवेज़, विष्णु प्रभाकर, गिरिराज किशोर, ज्ञानरंजन,असगर वजाहत, गोविन्द मिश्र, विद्या निवास मिश्र, 
* * * * निर्मल वर्मा, इस्मत चुगताई, राजेंद्र यादव, चित्रा मुद्गल,मैत्रयी पुष्पा
* * * * * कृष्णा सोबती, डॉ.राही मासूम रजा,धर्मवीर भारती, हरिवंश राय बच्चन,कमलेश्वर,                 

2 comments:

  1. यह सूची तो केवल वरिष्ठ और मित्र साहित्यकारों तक ही सीमित रही शायद इसीलिये मेरी पसन्द ये वरिष्ठ नाम दिखे नहीं, जैसे मन्नू भंडारी, उपेन्द्रनाथ अश्क़, पण्डित सुदर्शन आदि। वैसे फ़ुर्सत में नीचे के लिंक पर भी एक नज़र डालने की कृपा करें, क्या पता अगली "कनिष्ठ" सूची का एकाध सितारा अपने हिस्से में भी आ जाये:
    कुछ कहानियाँ - अनुराग शर्मा

    ReplyDelete
  2. swagat. par jaisa jikra maine kiya tha, yah soochi kewal un logon kee hai jinse main pratyakshy roop se milta raha. main intzaar me hoon ki meri agli amerika yatra me aapko roo-baroo dekhoon, aur fir ek nahin, kai sitare aapke khate me daloon. rajendraji ke sath kai shamen guzarne ke baad bhi mannuji ko nahin dekha.ashkji pahle vishw hindi sammelan me the par sanyog aisa baitha, ki nahin milna ho paya.

    ReplyDelete

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...