Wednesday, July 9, 2014

"सकारात्मकता" पहचानना आना चाहिए आपको

 जब मैं कहता हूँ कि नयी पीढ़ी आज के नायकों को "अपने मोहल्ले का" समझती है, तो मुझसे कुछ मित्र जानना चाहते हैं कि  मैं आज के नायकों को 'अंडर एस्टिमेट' कर रहा हूँ या नयी पीढ़ी को?
मैं बुरी तरह चौंक जाता हूँ। यदि मेरी बात का यह मतलब निकल रहा है तो मुझे फिर से सोचने दीजिये।
पुराने ज़माने के लोग जब कहते थे कि अमुक व्यक्ति 'वहां' का है तो इसलिए, कि इससे उसके व्यक्तित्व पर कुछ रोशनी पड़ जाये।  वहां का है, तो इस तरह बोलता होगा, इस तरह का खानपान पसंद करता होगा, इस तरह के पहनावे में रहता होगा, आदि-आदि।
किन्तु नई पीढ़ी और आज के नायकों का सौभाग्य है कि अब ऐसा नहीं है।
अब कोई एक शहर में पैदा हुआ है, दूसरे शहर या देश में पढ़ा है, तीसरे देश के पहनावे को पसंद करता है, चौथे की डिशेज़ उसकी पसंदीदा हैं, पांचवें में उसकी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड रहते हैं, … तो वह सबको अपने मोहल्ले का ही समझेगा न ? उसके साथ शहर, राज्य या देश का नाम क्यों जोड़ें? और कैसे जोड़ें?
तो अब कौन कहाँ का ? सब इस जहाँ के !        

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