Sunday, July 13, 2014

अब तक

घूमता-घूमता वह फ़क़ीर उस गाँव में भी चला आया। उसे हैरत हुई जब उसने देखा कि लोग न केवल उसका मान कर रहे हैं, बल्कि उसे भोजन भी दे रहे हैं। वह कृतार्थ होता रहा।
तभी एक किशोर ने उससे पूछा- "बाबा, लोग आपको बिनमाँगे सम्मान और रोटी दे रहे हैं,क्या आप बदले में उनका कुछ अच्छा नहीं करेंगे?"
"बोल बेटा,क्या कहना चाहता है?" फ़क़ीर ने कहा।
लड़का बोला-"गाँव में एक बबूल उग गया है, हम चाहते हैं कि उसकी जगह जामुन हो, थोड़ी छाँव मिले, काँटों से पीछा छूटे,खट्टे-मीठे फल लगें और हम बच्चों को चढ़ने-खेलने के लिए एक ठौर मिले।
बाबा ने कहा-"ऐसा करो, बबूल को सब मिल कर काट दो, कुछ दिन बिना छाँव के रहने का अभ्यास करो, एक जामुन का बीज बो दो और उसकी परवरिश करो,कुछ समय बाद तुम्हारी इच्छा पूरी होगी।"
लड़का सकपकाया-"… पर बाबा,ये सब तो हम भी कर लेते!"
-"तो अब तक किया क्यों नहीं?" फ़क़ीर ने जाने के लिए अपनी गठरी उठाते-उठाते कहा।               

2 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवारीय चर्चा मंच पर ।।

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