Monday, July 14, 2014

"आप दुनिया में क्यों आये हैं?"

चार लोग एक बगीचे में टहलते,बातें करते, एक-दूसरे की कहते-सुनते चले जा रहे थे।
उनका ध्यान बंटा तब, जब एक किशोर वय के बच्चे ने उन्हें नमस्कार किया।
चारों ने ही जवाब तो दे दिया, किन्तु वस्तुतः वे उसे पहचाने नहीं थे। सभी ने यह सोच कर उसके अभिवादन का प्रत्युत्तर दे दिया कि वह उनमें से किसी अन्य का परिचित होगा।
लड़का तब रुका और बोला-"मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ, पर मेरा आग्रह है कि आप सभी एक मिनट का समय मुझे अलग-अलग दें,ताकि मैं आपके मौलिक जवाब अलग-अलग ही जान सकूँ।"
वे सहर्ष तैयार हो गए।
लड़के ने बारी -बारी से उन्हें एक ओर ले जाकर सवाल किया-"आप दुनिया में क्यों आये हैं?"
सभी उम्रदराज़ थे, पर ऐसा कभी उन्होंने सोचा न था। साथ ही बच्चे को कुछ सार-गर्भित कहने की इच्छा भी थी।
पहले ने कहा-"मुझे ईश्वर ने भेजा है!"
दूसरा बोला-"माता-पिता की इच्छा के कारण मेरा जन्म हुआ!"
तीसरे का उत्तर था-"अपने देश की सेवा करने को मैंने जन्म लिया!"
चौथा कहने लगा-"मेरे भाग्य में जीवन-सुख था!"
बच्चे ने सभी को धन्यवाद दिया और जाने लगा। लेकिन उन चारों ने ही महसूस किया कि बच्चा उनकी बात से खुश नहीं है, क्योंकि वह काफ़ी परेशान सा दिख रहा था।
वे बोले-"बेटा,तुम ये तो बताओ कि ये गूढ़ प्रश्न तुमने क्यों किया, और अब तुम इतने दुखी से क्यों हो?"
बच्चा बोला-"मुझे तो अपने होमवर्क में इसका उत्तर लिखना था, पर पार्क बंद होने का समय हो गया और चौकीदार ताला लगा कर चला गया। अब आप सबको ऊंची दीवार कूद कर वापस जाना होगा।"
वे चारों हड़बड़ा कर दरवाजे की ओर दौड़े। पीछे से बच्चे की आवाज़ आई-"अंकल संभल कर जाना, बाहर मेरा कुत्ता होगा!"
        

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