Saturday, June 7, 2014

किसी दूर के राही से पूछते हैं कि वहां से हमारा भारत कैसा दिखाई देता है? चलिए पिट्सबर्ग से अनुराग जी बताइये-

  कभी अंतरिक्ष में उड़ते राकेश शर्मा से तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा था कि वहां से भारत कैसा दिखाई देता है ? राकेशजी ने बिना एक पल भी गंवाए अद्भुत हाज़िरजवाबी से कहा-"सारे जहाँ से अच्छा !"
भारत ने पिछले दिनों फिर एक नया चोला बदला है। आइये, पता लगाएं, कि इन दिनों ये कैसा दिखता है ?
कौन बताएगा ?    

2 comments:

  1. आपने मेरी सबसे कमजोर रग पर हाथ रखा है। मुझे सदा यही लगता है कि भारत को जानने के लिए मेरा एक जन्म काफी नहीं है। जितना अधिक जानता जाता हूँ, उससे अधिक अंजाना सामने आता है। सबसे ताज़ा प्रश्न जो पिछले कुछ सालों से मथ रहे हैं वह यह कि जो संसार बदलने की क्षमता रखते थे उन्होने हाशिये पर सिमटना कैसे स्वीकार किया? जिहोने यह समझ लिया था कि इस देश को हर साल रावण दहन की ज़रूरत है वे रावण के लक्षण क्यों नहीं दिखा पाये? जो संसार के सबसे बड़े समुदाय को शाकाहारी बना गए वे द्वेष और हिंसा को कम क्यों न कर पाये? सवाल और भी हैं लेकिन शायद मैं आपके मूल प्रश्न से भटक गया, सो वापस आता हूँ - भारत कैसा दिखाई देता है?
    * मैं आशान्वित हूँ, भारत आज भी सक्षम और आशा का स्रोत नज़र आता है। भारत की आत्मा कभी मरी नहीं, उसे कभी मारा नहीं जा सकता। डंडी मारकर ईमानदारी बेचने वालों से सावधान रहने की ज़रूरत है। भारत को भावना से उबरकर सत्यमेव जयते में विश्वास वापस लाना ही पड़ेगा ...
    (आभार!)

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  2. Behad santulit, khoobsurat aur saar-garbhit!

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