Saturday, June 14, 2014

दिन आये मधुर सुहाने - "मोरा गोरा रंग लैले, मोहे श्याम रंग.… "

लोग गोरे रंग पे कितना ही गुमान करें, कभी न कभी ऐसा समय आ ही जाता है, जब सब श्याम रंग, अर्थात काले रंग पे रीझ जाएँ।
किसी ने कभी सोचा भी न होगा कि कभी इतने रंग-बिरंगे दिन आएंगे,जब सब "काला" हो जाय !
तो वे दिन आ गए।
आज जिसे देखो, उसी की नज़र काले पर है।
नगर-नगर डगर-डगर लोग गा रहे हैं-"आरे कारे बदरा, लारे जा के नीर"
"छा जा री कालिमा चहुँ ओर, चली मत जइयो कहूँ और "
आखिर सरकार ने जस्टिस शाह की अध्यक्षता में विशेष जाँच दल का गठन कर ही दिया, जो अब विदेशों में भारतीय काले धन का पता लगाएगा। माननीय न्यायाधीश महोदय ने इस दल की एक बैठक आयोजित भी कर ली है और काले धन को देश में वापस लाने का रोडमैप तैयार करना भी शुरू कर दिया है।
इस कदम से कई बड़े-बड़े खुलासे होंगे।
-सब जानेंगे कि जब रिज़र्व बैंक ने हरे, नीले, गुलाबी नोट छापे थे तो ये काले कैसे हो गए ?
-सब देखेंगे कि जब इन नोटों के मालिक यहाँ खुले घूम रहे हैं तो ये नोट वहां जाकर क्यों कैद हो गए?
-सब देखेंगे कि यहाँ जिन करोड़ों किसानों ने खेतों में हल चलाये, जिन करोड़ों मज़दूरों ने कारखानों में मशीनें चलाईं,आंच पे उनकी रोटी काली कैसे हो गई? उनके बच्चों के सपने काले कैसे हो गए?      
   

No comments:

Post a Comment

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...