Friday, May 31, 2013

हम इतने महान कैसे बने ?[अंतिम]

राजा के सांत्वना देने पर मालिन बोली-"महाराज, आपका बेटा घोड़े पर बैठ कर मंदिर के सामने से निकल रहा था, वह दर्शन करने के लिए उतरा तो मेरी बेटी ने जाकर एक माला उसके गले में डाल दी और अब जिद पकड़ कर बैठी है, कि  राजकुमार से शादी करेगी।"
राजा यह सुन कर आग-बबूला हो गया, बोला- "यह क्या मज़ाक है, उसे समझाओ, ऐसा नहीं हो सकता।"
मालिन बोली- "मैंने उसे बहुत समझाया, वह तो जान देने पर उतारू थी, पर मुश्किल से वह एक शर्त पर अपनी जिद छोड़ने पर तैयार हुई है।"
राजा ने फ़ौरन कहा- "क्या शर्त है, जल्दी बोलो, हमें सब मंज़ूर है।"
मालिन ने कहा- "वह चाहती है कि  आप सिर्फ एक दिन के लिए उसे राज्य की रानी बनादें "
राजा सोच में पड़ गया। प्रधान मंत्री ने फ़ौरन कहा- "सोच क्या रहे हैं महाराज, हाँ कह दीजिये, जान भी  छूटेगी, और प्रजा आपको महान भी कहेगी।"
राजा ने कहा- "हमें मंज़ूर है, पर हमारी भी एक शर्त है, प्रजा को यह वचन देना होगा- "फिर कभी कोई भी  किसी बात पर सट्टा नहीं खेलेगा। "
सारा वातावरण राजा की जय-जय कार से गूँज उठा।
   

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