Monday, May 27, 2013

हम इतने महान कैसे बने? [पाँच ]

राजा को कोई उत्तर देने से पहले रानी ने उनसे दो दिन की मोहलत मांगी, जो उन्हें तुरंत मिल गई।
अगली सुबह रानी ने महल में राज्य की प्रतिष्ठित महिलाओं की एक बैठक बुलाई। उन्हें संबोधित करते हुए रानी ने कहा- "हमें दैवयोग से इस राज्य का शासन मिल रहा है, किन्तु हम इसे स्वीकार करने से पहले आप सब की राय जानना चाहते हैं, आप सब बारी-बारी से अपनी बात कहें।"
महिलाओं ने कहना शुरू किया- "हमारा राज्य शुरू होते ही इसकी तुलना पुरुष शासकों से होने लगेगी, अतः यह सुनिश्चित किया जाय, कि  क्या वे भी हमें शासन चलाने में वैसा ही सहयोग देंगे, जैसा हम उन्हें देते हैं?"एक महिला बोली।
दूसरी ने कहा- "जब आप दरबार में जायेंगी, तो क्या राजा आपके वस्त्र, भोजन, समय और सुविधाओं का वैसा ही ध्यान रख पाएंगे, जैसा आप उनका रखती हैं?"
तीसरी ने कहा- "जब आप राज-काज के सिलसिले में अन्य पुरुषों के साथ उठना-बैठना, बातचीत या खानपान का व्यवहार करेंगी तो क्या  राजा बिना किसी ईर्ष्या-जलन के उसे स्वीकार करेंगे?"
चौथी ने कहा- "क्या राजा राजकुमार की देखभाल, लालन-पालन की ज़िम्मेदारी उठाएंगे?"
बैठक अभी चल ही रही थी कि  राजा, जो छिपकर इन लोगों की बातें सुन रहे थे, चिंतित हो गए।

No comments:

Post a Comment

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...