Friday, May 24, 2013

हम इतने महान कैसे बने? [दो]

गुप्तचरों से यह जवाब सुन कर राजा चिंता में पड़ गया। उसे लगा, यह तो बुरी बात है, जनता जुआ खेले, और उससे अमीर बने, यह तो उचित नहीं।  राजा ने मन ही मन कुछ निश्चय किया।
अगले दिन से शाम को राजा के व्यवहार में अजीब सा परिवर्तन आ गया।वह कबूतर हाथ में लेकर उड़ाने लगता, फिर अचानक रानी से कहता, अच्छा लो, इसे तुम उड़ाओ। कभी रानी को पहले कबूतर देता, और जब वह उसे उड़ाने लगती, तो अचानक उसके हाथ से छीन लेता और कहता, नहीं-नहीं, मैं उड़ाऊंगा।
इस विचित्र व्यवहार से रानी चिंता में पड़  गई। उसने राज वैद्य से सलाह की। राज वैद्य ने कहा- इसका एक ही उपाय है। अब तक आप लोगों ने जितने भी कबूतर उड़ाए  हैं, वे सभी वापस लाये जाएँ,तो राजा ठीक होकर ये विचित्र आदत छोड़ सकते हैं।
रानी ने मुनादी करवा दी कि  जो कोई भी सफ़ेद कबूतर लाकर देगा, उसे कबूतर की कीमत के अलावा एक सोने की मोहर इनाम में दी जायेगी।
देखते-देखते प्रजाजनों की भीड़ महल के द्वार पर लगने  लगी। सबके हाथ में कबूतर थे। महल का पूरा अहाता कबूतरों का दड़बा  बन गया, और राज्य का खज़ाना तेज़ी से खाली होने लगा। 

No comments:

Post a Comment

Some deserving ones for...No. 1

देश जल्दी ही एक नए राष्ट्रपति का नेतृत्व पाने को है। कहना पड़ता है कि राजनैतिक दलों का आपसी वैमनस्य और कटुता असहनीय होने की हद तक गिर चुके ह...

Lokpriy ...