Tuesday, May 28, 2013

हम इतने महान कैसे बने ? [छह]

राजा ने सोचा था कि  थोड़े दिन रानी के हाथ में शासन देने का नाटक करेंगे, घर भी वह संभालेगी, दरबार भी वही, आराम से शिकार खेलेंगे, घूमेंगे-फिरेंगे। पर यहाँ तो माजरा ही दूसरा था। ये तो जोर-शोर से इतिहास रचने में जुट गई।
राजा ने प्रधान मंत्री की राय ली। प्रधान मंत्री बोला- महाराज, आज तक किसी महिला ने शासन तभी किया है, जब उसका पति न रहा हो, या फिर शासन-योग्य न हो, आप अपने होते हुए इस चक्कर में न पड़ें।राजा को बात ठीक लगी। उसने रानी से कह दिया, कि  महिलाएं न चाहें, तो कोई बात नहीं, वे ये दायित्व न लें।
राजा रानी का विचार-विमर्श चल ही रहा था कि  तभी महल में तेज़ी से एक मालिन ने प्रवेश किया। वह हाथ जोड़ कर बोली- महाराज मुझे क्षमा करें, पर मैं राजकुमार की शिकायत करने आई हूँ।उसकी बेबाकी से राजा-रानी दोनों सन्न रह गए।
वह बोली- मैं अकेली विधवा जंगल से फूल चुन कर मंदिर के बाहर मालाएं बेच कर गुज़ारा करती हूँ। मेरी एक छोटी सी बेटी है। मैं उसका लालन-पालन कर रही हूँ, पर आज तो अनर्थ हो गया।
उसके इतना कहते ही राजा-रानी चिंता में पड़  गए।  

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