Monday, May 6, 2013

भला ऐसा भी कहीं होता है?

एक बार एक आदमी ईश्वर के पास गया, और हाथ जोड़ कर बोला- "मुझे वरदान दो, कि  मेरी मनोकामना पूरी हो।" कुछ होता कि  उसके पहले ही दूसरा आदमी वहां आया और अगरबत्ती जला कर बोला- "प्रभु, मेरी मनोकामना पूरी करो।"
मुश्किल से एक पल बीता होगा कि  तीसरे आदमी ने वहां प्रसाद चढ़ा कर कहा-"मेरी मनोकामना पूरी करना"
तत्काल चौथे आदमी ने आकर कुछ भेंट चढ़ाई और निवेदन किया-"भगवान, मेरी मुराद पूरी करो।"
वह आदमी पलटता, उसके पहले ही एक और आदमी बोरा भर कर नोट लाया, और रख कर हाथ जोड़ दिए- "प्रभु, मेरी मुराद पूरी करना।"
तभी एक और आदमी ने भीतर आकर हीरे-जवाहरात का बक्सा पलट कर कहा-"स्वामी, मेरी मनोकामना पूरी हो ।"
तभी एकाएक कोलाहल होने लगा, बाहर भीड़ जमा होने लगी। कुछ आवाजें आने लगीं-"मूर्ति को यहाँ से हटाओ !"
लोगों को गहरा अचरज हुआ जब उन्होंने सुना कि  मूर्ति  से आवाज़ आई- "मुझे नहीं, पुजारी को हटाओ, चढ़ावा तो यही ले जाता है, और हो सके तो कभी अपने गिरेबान में भी झाँको ।"


3 comments:

  1. Meri bhi ishwar se manokamana h ki sabhi apne girebaan me jhankne lge... :(

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  2. Meri manokamna hai ki ishwar tumhari manokamna poori kare.

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  3. Meri manokamna hai ki ishwar ki manokamna poori ho jaye...!! :)

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