Sunday, November 13, 2011

सूर्य के प्रकाश में

सुबह-सुबह पड़ोस में रहने वाले मित्र बता रहे थे कि उनका बेटा क्रिकेट की बाल लाने के लिए पैसे मांग कर बाज़ार चला गया.
सामने रहने वाले सज्जन से भी बात हुई, वे कह रहे थे आजकल पानी का प्रेशर बड़ा कम हो गया है, उनकी पत्नी बाथरूम में बाल धो रहीं थीं कि पानी चला ही गया.
मेरे एक मित्र दोपहर को आगये, बोले- इस तरफ आया था बाल कटवाने, तो आपकी तरफ भी मिलने चला आया.
आज रविवार था, यानि सन्डे, इस लिए सूर्य के प्रकाश में सभी ने अपने-अपने काम निबटा लिए- मेरे एक मित्र फोन पर बोले- मेरी बेटी के स्कूल में कल कोई फंक्शन है, उसके लिए बेटी कोई कविता मांग रही है, यदि बाल-साहित्य की कोई पत्रिका हो तो उन्हें देदूं.
मैं सोच में पड़ गया-"बाल दिवस" तो कल है, ये इन सब को आज क्या हो गया?   

No comments:

Post a Comment

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...