Tuesday, November 22, 2011

जाट देवता [संदीप पंवार] के "क्यों" का जवाब देना बाक़ी है,मैं हर भारतीय को "स्मार्ट इंडियन" ही देखना चाहता हूँ

संदीपजी ने मुझसे पूछा था कि किसी फोलोअर के आने-जाने पर रुक कर सोचना मुझे क्यों ज़रूरी लगा?
इसका उत्तर मैंने अपनी पोस्ट में भी दिया था कि 'स्मार्ट इंडियन' के लम्बे, प्रतिक्रिया भरे, निरंतर संवाद के बाद उनका ओझल होना मैं एकाएक  पचा नहीं पाया, इसलिए मैंने उनकी चर्चा की थी. मैं मन ही मन यह भी सोच रहा था कि वे ज़रूर किसी तकनीकी कारण से 'अंतर्ध्यान' हुए हैं, अवश्य लौटेंगे. मैं सही था, वे फिर से मेरे साथ हैं.
अब मैं यह भी कहना चाहूँगा कि मैंने केवल अपने फोलोअर होने के नाते ही यह सब नहीं कहा, बल्कि उनके बारे में जितना भी जान पाया हूँ, मुझे लगता है कि वे केवल एक स्मार्ट भारतीय ही नहीं, वरन  एक आदर्श भारतीय भी हैं. स्मार्टनेस की परिभाषा एक लम्बे रेंज की बहुआयामी परिभाषा है, किन्तु इसका सर्वाधिक सकारात्मक रिफ्लेक्शन, या बल्कि उत्कीर्णन उनके व्यक्तित्व में है.
 वे अमेरिका के पिट्सबर्ग में रहते हैं, लेकिन वे अपने मानस में भारतीयता का वस्तु-तत्त्व सहेज कर रखे हुए हैं. उनपर अन्य कई बड़े साहित्यकारों वाला मुलम्मा नहीं है. वे विस्थापित मनस्विता के प्रवासी-यायावर नहीं हैं, वे अपने जीवन-संचय में मिट्टी, गंगाजल और स्मृतिबीज लिए हुए अपने  इच्छित स्थान पर बसे हुए हैं.वे भारतीयता की सघन नर्सरी "रसोई-बाग़' की सी आत्मीयता से लिए हुए हैं.
 मुझसे यह सब किसी और ने नहीं, बल्कि उन्ही की रचनाधर्मिता और प्रतिक्रियात्मक ऊष्मा ने कहा है जो उनकी जिजीविषा को उनके 'ब्लॉग्स' पर बिछाए हुए है.उनका 'स्पान ऑफ अटेंशन' आश्चर्यजनक रूप से व्यापक है.
अभी उनके बारे में इससे ज्यादा नहीं कहूँगा, वे सुन रहे हैं. उनके साहित्यिक कद को हम फिर कभी  माप कर देखेंगे.      

3 comments:

  1. आपके रुख से सहमत हूँ इस लेख में उन पुराने पोस्ट का लिंक भी लगा देते तो अच्छा रहता।
    जो देश से दूर रहकर भी मन से यहाँ है वो सच्चा भारतीय है।

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  2. जी, पहले तो आपका आभार। इस आलेख से एक स्ंसमरण याद आया। बैंगलोर में एक ट्रेनिंग के आखिरी दिन अपने-अपने घर के लिये निकलने से पहले हम कुछ मित्र एक प्रशिक्षक को धन्यवाद देने गये तो उन्होंने कहा था, "दूसरों की विशेषतायें पहचान पाने का विशाल हृदय सबमें नहीं होता।" आपसे परिचय भी हिन्दी ब्लॉगिंग का एक उपहार है मुझे।

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  3. aap dono ka aabhar. un sab vaigyanikon ka bhi aabhar, jinhone hamari bhaugolik dooriyon ki parwah kiye bina hame mann se kareeb hona sambhav banaya.

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