Wednesday, November 23, 2011

थोड़े से कांटे आलोचना के, मगर बहुत सारे फूल बधाई के भी बनते हैं, मायावतीजी के लिए

एक बस्ती थी. उसमें सौ लोग रहते थे.
एक और बस्ती थी. उसमें एक हज़ार लोग रहते थे.
एक और भी बस्ती थी. इस बार उसमें एक लाख लोग रहते थे.
मज़े की बात देखिये, कि फिर  एक और भी बस्ती थी. और उसमें रहते थे पूरे एक करोड़ लोग.
सब बस्तियों में एक-एक राजा था.सब में एक-एक महल था. सब में एक-एक क्रिकेट टीम थी. सब में एक-एक ज्ञानपीठ और एक-एक ऑस्कर अवार्ड बंटता था.
पहली बस्ती में हर दस में से एक खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में आ गया, दूसरी में हर सौ में से एक खिलाड़ी, तीसरी में हर दस हज़ार में से एक खिलाड़ी और चौथी बस्ती में से हर दस लाख में से एक खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में आ पाया.
नतीजा यह हुआ कि सोवियत रशिया ने एक टीम तोड़ कर तेरह बनालीं.एक कुर्सी तोड़ कर तेरह बनालीं, और बन गए तेरह राष्ट्रपति , तेरह प्रधान-मंत्री, तेरह राजमहल, और मिलने लगे तेरह अवार्ड.
यदि इस गणित में ज़रा भी दम है तो मायावतीजी निश्चय ही बधाई की हकदार हैं.
यह दूरदर्शिता ही कही जाएगी कि जब उत्तरप्रदेश जीतने चारों दिशाओं से चार सेनाएं निकल पड़ी हों, तो मुख्य मंत्री और राज्यपाल भी चार क्यों न कर लिए जाएँ? चार विधानसभाएं, चार राजधानियां...चार चाँद लग जायेंगे प्रदेश की खुशहाली में.
लेकिन इससे कोई ये न समझ ले कि रुपया चवन्नी बन कर रह जायेगा? रूपये की नज़र तो अब डॉलर पर है.
खेल तो अब शुरू होगा- सबसे बड़ा खिलाड़ी चुनने के लिए. माया,ममता,मोदी,नीतीश,जयललिता, राहुल, और "अबव- आल"आडवाणी जी...एंड मैनी मोर!       

1 comment:

  1. विकास का यह मॉडल भी ठीक है। दिल्ली के मॉडल पर हर शहर का एक मंत्रिमंडल, एक मुख्यमंत्री होना चाहिये।

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