Tuesday, July 31, 2012

हाँ, बस यही कह रहा था मैं

अभिनव बिंद्रा को इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वे स्वर्णिम सितारे की तरह ओलिम्पिक में गए थे। गगन नारंग अब हमारा नया सितारा हैं। अब हम  लौटने के बाद उनकी आभा में सांस लेंगे। गगन की सफलता का श्रेय मैं नहीं ले रहा, पर मेरा मतलब यही था। ज़बरदस्त सफलता से अनुभवी खिलाड़ियों के व्यक्तित्व की वह अदम्य आस धूमिल हो जाती है जो उन्हें अपने प्रदर्शनों के वक्त अतिरिक्त पैनापन देती है। वे आसानी से कह पाते हैं कि  दर्शक शोर मचा रहे थे, इसलिए मैं हारा। वे यह नहीं सोच पाते कि  दर्शक उन्हें जिताने के मकसद से स्टेडियम में कभी चुप नहीं बैठेंगे। उन्हें दर्शकों के उल्लास-भरे हो-हल्ले में ही जीतना-हारना होगा। अब हम उसी ब्लेड से शेव करेंगे, जिससे गगन करते हैं। वे बिस्किट हमें स्वादिष्ट नहीं लगेंगे, जो बिंद्रा को पसंद थे। हम ऐसे ही हैं, इसलिए गगन और बिंद्रा खेलें, हम पर ज्यादा ध्यान न दें, कि हम चुप बैठे थे या कि  चिल्ला रहे थे।
गगन को इस शानदार सफलता पर गरमा-गर्म बधाई।
यह पटाक्षेप नहीं है, देश और सफलताओं की राह देख रहा है।    

No comments:

Post a Comment

प्राथमिक उपचार है तुष्टिकरण

यदि दो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों और उनमें से एक अपने को कमज़ोर पा कर रो पड़े तो हम उनमें फिर से बराबरी की भावना जगाने के लिए एक का तात्कालिक ...

Lokpriy ...