Wednesday, April 9, 2014

आपको क्या सही लगता है?

किसी समय भारत में एक पूरे जीवन को चार आश्रमों में बाँट दिया जाता था-ब्रह्मचर्य,गृहस्थ,वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम. इन सभी में उम्र बिताने के लिए औसतन २५ साल का समय निर्धारित था. इस तरह यह माना जाता था कि एक व्यक्ति की औसत आयु सौ वर्ष होगी.
अब न तो औसत उम्र सौ साल रही है, और न ही जीवन पहले जैसा सरल, एकसा और साधारण रहा है. अब जन्म, परवरिश करने की  शैली , सामाजिक स्तर , आर्थिक सम्पन्नता और निजी पसंद-नापसंद को देखते हुए बातें तय होती हैं.
यदि हम जीवन को निम्न अवस्थाओं में बाँटें-
-बचपन
-किशोरावस्था
-युवावस्था
-प्रौढ़ावस्था
-वृद्धावस्था
तो आप मनुष्य की  औसत आयु ८० वर्ष मानते हुए इन अस्सी सालों को इन पाँच अवस्थाओं में कैसे बांटेंगे?यह बिलकुल आवश्यक नहीं है कि हम इन अवस्थाओं को बराबर के "साल" दें.  फिर हम यह भी निर्धारित करेंगे कि एक औसत व्यक्ति को इन अवस्थाओं में ज़िंदगी के क्या-क्या कार्य, कब-कब सम्पादित कर लेने चाहिए.
नोट- मुझे ये भी लगता है कि हर व्यक्ति को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए कम से कम एक वर्ष बिलकुल प्राकृतिक रूप में, पशुओं या अन्य प्राणियों की तरह बिना आधुनिक संसाधनों के, यथासम्भव जंगल में जाकर बिताना चाहिए. आप यह भी बताएं, कि आप अपने इस "प्राकृतिक" वर्ष को किस उम्र में मनाना पसंद करेंगे ?             

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