Wednesday, April 9, 2014

झूठी,आलसी,निकम्मी,कामचोर,अहसान फरामोश

एकबार गिलहरी,चूहे,खरगोश,छिपकली,मेंढ़क आदि कुछ मित्रों ने मिल कर जंगल में एक कमरा किराए से ले लिया.मिला भी सस्ता, क्योंकि लोमड़ी के पास तो कई थे.
जंगल में हवा भी चलती थी, तूफ़ान भी आते थे, बारिश भी होती थी, चलो, अब इन सबसे छुटकारा मिला.
कुछ दिन तो मज़े से बीते लेकिन फिर एक दिन बैठे-बैठे उन सबका माथा ठनका. सबने देखा, कमरा दिनोंदिन गन्दा होता जाता है. जंगल में तो हवा-पानी से सब जगह सफाई होती रहती थी, मगर अब इस कमरे में तो दुनिया-भर का कचरा जमा होने लगा.सब चिंतित हो गए.
जाकर लोमड़ी से शिकायत की- "मैडम, आपका कमरा तो दिनोंदिन गन्दा होता जाता है."
लोमड़ी ने कहा- "प्यारे बच्चो,सफाई की  जिम्मेदारी मकान-मालिक की  नहीं, किरायेदार की  होती है, तुम एक झाड़ू लाकर रखो, सब ठीक हो जायेगा."
उत्साह में भरे सब एक झाड़ू खरीद लाये.कुछ दिन बीते, तो फिर सबका ध्यान इस बात पर गया, कि कमरा तो अब भी गन्दा का गन्दा ही है !
वे सब बौखला कर झाड़ू के पास जाकर बोले- "क्योंजी, तुम्हारा फायदा ही क्या है? गंदगी तो ज्यों-की त्यों है."
झाड़ू कुछ न बोली, बस, मासूमियत से धीरे-धीरे मुस्कराती रही.
इस ढीठपने से सब क्रोधित होकर उखड़ गए और लगे झाड़ू को कोसने- "झूठी, आलसी,निकम्मी, कामचोर,अहसान फरामोश … "
तभी खिड़की से झांक कर लोमड़ी बोली- "बेटा, झाड़ू पड़ी- पड़ी सफाई नहीं करती, इसे हाथ में लेना पड़ता है !" यह सुन कर सब हक्के-बक्के रह गए और खूब शर्मिंदा हुए.
शिक्षा-हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि झाड़ू पड़ी-पड़ी सफाई नहीं करती, इसे "हाथ" में लेना पड़ता है !             

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