Thursday, April 26, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट [भाग 54 ]

     ...एमरा की डायरी को पढ़ने के बाद पेरिना ने अपने भीतर एक ज़बरदस्त बदलाव महसूस किया. कई प्रश्न उसके अंतर्मन में धुआं बनकर उठे और धीरे-धीरे सुलगने  लगे.उसका जीवन भी बदलने लगा. अब वह अपना ज्यादा समय पढ़ने में ही बिताती, और न जाने कौन-कौन सी किताबों में दिन-रात खोई रहती. 
     उसे यह बात झकझोरती  थी, कि एक सिद्ध पुरुष स्त्री से जीवन भर बच कर कैसे सिद्ध हो सकता है? क्या वह उस क्षण को भूल सकता है, जब दुनिया में उसका पदार्पण हुआ? क्या स्त्री से बच कर दुनिया में आने की कोई और राह भी है?स्त्री के शरीर में बन कर, उसके दर्द के सहारे दुनिया में आने वाले उसकी अवहेलना कैसे कर सकते हैं? क्या यह निरा पाखंड नहीं है? कौन सा ईश्वर है,जो  किसी को 'सिद्ध' बनाने के लिए औरत से बचने की शर्त रखता है?यदि किसी देश-समाज में ऐसा कोई देवता है, तो उसके पास दुनिया चलाने के लिए स्त्री की भूमिका से बचने का कोई विकल्प है? 
     डेला को यह आश्चर्य होता कि माँ का अधिकांश समय अब शहर के पुस्तकालयों में ही बीतता है. वह न केवल नियमित लायब्रेरी जाती हैं, बल्कि बाज़ार में भी कपड़ों और ज्वैलरी  से ज्यादा बुकस्टोर्स  पर ही देखी जाती हैं.डेला की दोनों बेटियां सना और सिल्वा अपनी दादी के इस बदलाव को जब संजीदगी से लेतीं, तो डेला को भी यह लगता कि अब उनके पास रहने से बेटियों के कैरियर को लेकर उसे कोई चिंता नहीं रहेगी. वह कुछ दिन माँ, और बेटियों के साथ बिता कर वापस चाइना लौट जाती. 
     किन्ज़ान को चीज़ों को जमा करने का शौक था, वह अब धीरे-धीरे कारोबार में बदलता हुआ, किसी खोज और अनुसन्धान में तब्दील हो गया. पेरिना के नए शौक ने उसमें पुरानी पुस्तकों का इज़ाफ़ा भी कर दिया.किन्ज़ान और पेरिना न जाने किस खोज में रहते? न जाने क्या ढूंढते? तेज़ी से युवा होतीं सना और सिल्वा भी अब इस वृद्ध दंपत्ति से मित्रवत हो चली थीं. 
     किन्ज़ान का कारोबार भी अब पेरिना के हवाले होने लगा. क्योंकि किन्ज़ान का अब बाहर जाना बहुत कम होता था, और पेरिना अपनी जिज्ञासा को लेकर न केवल व्यस्त रहती थी, बल्कि उसका घूमना भी ज्यादा होता. उसकी दिलचस्पी लगातार इस बात में होने लगी, कि स्त्रियों को लेकर दकियानूसी ख्याल जिन देशों में भी हैं, वह वहां जाकर काम करे.कम से कम यह तो जाने कि जिन देशों और तबकों में स्त्री को समाप्त करने की वृत्ति है या  उसे जकड़ कर पिछड़ा बनाये रखने की जिद है, उन देशों के रहनुमाओं और आकाओं से यह तो जाने कि उनके पास वैकल्पिक  जीवन का क्या रास्ता है? जीवन का क्या विकल्प है? जो लोग औरत को जन्म लेने से पहले ही उसके शरीर में ही ख़त्म कर देने के षड्यंत्रों में जी रहे हैं, उनसे भावी  समाज का उनका वांछित  एक ब्ल्यू-प्रिंट तो लिया जाये.
     लेकिन पेरिना की योजना एकबार खटाई में पड़ गई, क्योंकि उसके विचार केवल उसे मथ रहे थे.   
     विचार जब पकने लगते हैं, तो शरीर भी युवा होने लगता है. उम्र तब कोई खास माने नहीं रखती. यही कारण था कि जब डेला ने एक लम्बे पत्र द्वारा अपनी माँ  पेरिना को उनके जल्दी शुरू होने वाले एक  मिशन के बारे में बताया तो  वह उत्तेजित होने की हद तक ख़ुशी से उछल पड़ी.सना और सिल्वा भी इस खबर से बहुत खुश हुईं, कि उनके मम्मी-पापा चाइना से एक खास मिशन पर यहाँ आ रहे हैं, और अब काफी दिनों तक अमेरिका में ही रहेंगे...किन्ज़ान की आँखों में तो आंसू ही आ गए. इसलिए नहीं कि उसकी बेटी वापस आ रही थी, बल्कि इसलिए कि  उसकी जिंदगी की एक बंद किताब के पन्ने फिर से खुलने के लिए फडफडा रहे थे...[जारी...]   

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