Friday, April 20, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट[ भाग 46 ]

     कुदरत ने धरती के श्रृंगार के लिए दो गहने बना छोड़े हैं. एक तो चमकती धूप, और दूसरी छिटकी चांदनी. चाँद और सूरज को दे दिया है ये काम, कि धरती पर कभी इनकी कमी न हो, बरसाते रहो, बरसाते रहो...कभी थक कर न बैठना, कोई छुट्टी- वुट्टी नहीं मिलेगी कभी. हाँ, थक जाओ तो बादल की चादर ओढ़कर आराम फरमालो. लेकिन चलते-चलते...रुकने की इजाज़त नहीं मिलेगी. 
     बस, इसी से कहीं- कभी -कुछ थमा नहीं. 
     धीरे-धीरे किन्ज़ान भी सब भूल बैठा, और पेरिना भी. समय ने उन्हें जो कुछ नहीं दिया, उसके एवज़ में बहुत कुछ और दिया. उनके एक प्यारी सी बिटिया हुई. 
     लेकिन एक बात है, समय चाहे सब कुछ भूल जाये, लोग नहीं भूलते. और जो लोग मन से जुड़ जाते हैं, वे तो कभी नहीं भूलते, कुछ नहीं भूलते.यही कारण था कि जब किन्ज़ान और पेरिना ने अपनी बिटिया का पहला जन्मदिन धूम-धाम से मनाया तो आने वाले मेहमानों में न्यूयॉर्क से  अपनी मालकिन-मॉम  के साथ आया वह नन्हा ब्राज़ीलियन पप्पी भी था, जिसका और  किन्ज़ान का सपना कभी एक था.हाँ, यह बात ज़रूर थी, कि वह नन्हा भी अब उतना छोटा न रहा था. अच्छा खासा शैतान-शरारती बन गया था.  
     इसी शानदार पार्टी में पेरिना की मेहनत और पसंद के लाजवाब व लज़ीज़ व्यंज़नों के बीच किन्ज़ान ने मेहमानों को बताया कि उनकी बिटिया डेला का जन्म नियाग्रा - फाल्स से गिरते बेशुमार पानी के छींटों के बीच आधी रात को एक  शिप में ही हुआ था.उनकी जिंदगी का वह नायाब तोहफ़ा चांदनी रात में लहरों पर डगमगाते जहाज़  पर ही उनकी झोली में आया था. 
     यह बात तो सुखद आश्चर्य और रोमांचक ख़ुशी की थी, लेकिन इसे बताते-बताते जब किन्ज़ान रो पड़ा तो सबको हैरानी हुई. ख़ुशी के इन आंसुओं ने पेरिना को भी उद्वेलित कर दिया. सब जानते  थे  कि किन्ज़ान भावुक होने वाले लोगों में नहीं है, इसलिए अब सबकी हैरानी इस बात को लेकर थी कि किन्ज़ान की अप्रत्याशित उदासी का राज़ जानें.मजबूरन किन्ज़ान को बताना ही पड़ा. 
     किन्ज़ान ने सब को  बताया कि डेला की दादी का जन्म जब हुआ था, तब वह एक बाल्टी पीने के पानी के लिए जेल में थी. अपने परिवार के लिए एक समय का पानी लाने के लिए उसे ज़बरदस्त संघर्ष करना पड़ा. 
     सब ग़मगीन हो गए. माहौल में देर तक नमी छाई रही.
     किन्ज़ान के दोस्त उसे उदासी से निकालने के लिए कुछ सोचते, इससे पहले ही पेरिना की चपल-तत्पर बुद्धि ने काम किया, और वह माहौल बदलने के लिए अपना कीमती पत्थरों का कलेक्शन उठा लाई, जिसे सब चाव से देखने लगे. पेरिना ने सबको बताया कि उसे तरह-तरह के पन्ने जमा करने का शौक है, और उसे जहाँ से भी कोई पन्ना मिलता है, वह खरीद लाती है. उसके कलेक्शन को सबने सराहा. पार्टी की रंगत फिर से हरी-भरी हो गई. बिटिया डेला को हजारों आशीषें मिलीं, जिसने दादी की प्यास को जीत कर अथाह पानी के सीने पर ही जन्म लिया...[जारी...]   

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