Monday, April 23, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट[भाग 50 ]

     इस साधारण सी डायरी को डेला ने आश्रम की म्यूजियम सेल में वैसे ही उठा कर देखा, और इसके पहले ही पृष्ठ पर खूबसूरत बारीक लिखावट में लिखा पाया- " प्यारी पेरिना और उसके पति किन्ज़ान के लिए...जो अपने हनीमून ट्रिप में भी समय निकाल कर आश्रम  देखने चले आये...'एमरा' "
     इतना पढ़ लेने के बाद डेला के लिए ऐसा कोई कारण नहीं था कि वह उस डायरी को न खरीदे.उसने किसी कीमती तोहफे की भांति उसे खरीद लिया. और वह डायरी, क्योंकि उसके माता-पिता के लिए थी, और इससे भी बढ़ कर, वह उनके हनीमून ट्रिप से सम्बंधित थी, डेला ने उसे पवित्र कुरान, बाइबिल या रामायण की तरह सहेज कर अपने पास रख लिया... उसका एक भी लफ्ज़ पढ़े बिना.
     पेरिना ने उसे पढ़ना शुरू किया तो उसे दीन-दुनिया की कोई खबर न रही.
     एमरा ने लिखा था कि उसने किन्ज़ान और पेरिना का बरसों इंतज़ार किया. उसे पूरी उम्मीद थी कि वे एक न एक दिन ज़रूर आयेंगे. किन्ज़ान को तो संतजी ने आने का आग्रह भी किया था, और यह कहा था कि वे उसके द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब चौथी बार में देंगे. इसलिए वह उनकी प्रतीक्षा में थी. लेकिन जब बहुत समय गुज़र जाने के बाद भी वे लोग नहीं आये, तो वह उनके लिए चिंतित भी थी. उसे लगता था कि कहीं उनके साथ कोई अनहोनी न घट गई हो.
     एमरा ने लिखा था कि वह बाद में आश्रम के सारे नियम-कायदे तोड़ कर 'बाबा' से भी मिली, केवल पेरिना की खातिर. इस बात का भी उसने खुलासा किया था कि हमेशा निर्वस्त्र रहने वाले बाबा  से मिलना निषिद्ध होने के बावजूद भी जाकर मिल लेने का उसे क्या दंड भुगतना पड़ा. 
     एमरा ने बाबा से केवल दो सवाल किये थे. एक तो यह, कि उन्होंने किन्ज़ान के पीछे दौड़ कर उसकी जेब से मृत मछली क्यों व कैसे निकाली? दूसरे, वे किन्ज़ान को देख कर 'पन्ना-पन्ना' क्यों चिल्लाये? 
     बाबा ने सर हिला कर उसके दोनों ही प्रश्नों का उत्तर देने की स्वीकृति दे दी.इस बात से एमरा बेहद खुश हुई. उसे यह यकीन हो गया कि इस जानकारी से वह अपने मेहमानों की मदद कर पायेगी. कई महीनों तक उन दोनों के वहां न आने से एमरा थोड़ी-थोड़ी मायूस होने लगी थी. उसके बाद उसे यह ख्याल आया कि वह ये सारी जानकारी लिख कर रख ले, ताकि लम्बा समय-अन्तराल हो जाने पर भी वह जानकारी सुरक्षित रहे, और कभी उन लोगों का पता-ठिकाना मिल जाने पर वह यह जानकारी उन तक पहुंचा भी सके. एमरा ने डायरी के अंतिम पन्ने पर यह खुलासा भी किया था कि वह यह सब क्यों कर रही है? उसका  पेरिना या किन्ज़ान से यह लगाव किस कारण पैदा हुआ ?
     एमरा ने लिखा था कि बाबा ने उसके प्रश्नों का उत्तर देने के लिए एक अजीबो-गरीब शर्त भी रख दी. बाबा ने उससे कहा कि वह एक चमड़े के हंटर से बाबा को पूरी ताकत लगा कर मारे. और तब तक मारती रहे, जब तक कि बाबा पूरे बदन पर लहू-लुहान न हो जाये.बाबा का कहना था, कि यदि वह ऐसा न कर पाई तो उसके प्रश्नों के सही उत्तर नहीं मिलेंगे.बाबा ने उसका यह अनुरोध भी ठुकरा दिया कि वह हंटर मारने के लिए आश्रम के किसी और कर्मचारी की सहायता लेले...[जारी...]           

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