Thursday, April 26, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट [भाग 53 ]

     बाबा द्वारा एमरा के दोनों सवालों का जवाब दे दिए जाने के बावजूद हैरानी की आंधी एमरा के लिए थमी नहीं. बाबा ने पहले तो यह बता कर चौंकाया, कि यह भटकती आत्मा अब भी शांत नहीं हुई है. और दूसरा इससे भी बड़ा झटका एमरा को यह जान कर लगा, कि इसी आत्मा ने कुछ वर्ष पूर्व किन्ज़ान की माँ के रूप में धरती पर जन्म लिया था.
     इस जानकारी से एमरा की ऑंखें एकबारगी खुली की खुली रह गईं, और अगले ही पल वह बेहोश हो गई.कुछ देर बाद आश्रम के बाहर और आसपास रहने वाले सभी कुत्ते एक साथ, एक स्वर में रोने लगे. 
     इस आवाज़ को सुन कर आश्रम के मुख्य संतजी नंगे पैर बाबा के भूतल स्थित आवास की और दौड़े. आश्रम का सारा निज़ाम थोड़ी देर के लिए गड़बड़ा गया.
     लड़खड़ा कर गिरते बाबा ने सेवकों के एक समूह से बुदबुदा कर सिर्फ इतना कहा- तुम लोग अब कहीं और चले जाना...यह आश्रम अब नहीं रहेगा...इतने में ही संतजी भी पहुँच गए और बाबा को सम्हालते-सम्हालते उन्होंने बाबा के आखिरी शब्द सुने-"...जीवन में पहली बार औरत से बात करके मैंने अपना नियम तोड़ दिया है, मेरी सिद्धियाँ मेरा साथ छोड़ गईं, मुझे अब लौटना होगा..." बाबा शांति से आँखें मींचे धराशाई हो गए. उन्होंने प्राण त्याग दिए.
     कोमा की हद तक बेहोशी की हालत में चली गई एमरा को कई दिन बाद होश आया, जब तक बाबा की अंत्येष्टि और सारे संस्कार संपन्न हो चुके थे. बाबा के चले जाने के बाद अब वह जान पाई कि बाबा ने उससे मिलने की क्या कीमत चुकाई.
     ऐसा कोई नहीं था जिसे एमरा बता पाती कि बचपन में उसका नाम एमरेल्ड ही था, जो बाद में एमरा रह गया. वह यह भी जान गई कि एमरेल्ड का अर्थ बाबा के देश में 'पन्ना' ही था. और यह सच भी वह अपने मन में छिपाए संन्यास की राह पर आई,कि उसने जीवन में कई बार विवाह किया, कई बार उसकी संतानें भी हुईं , लेकिन उसके भाग्य और स्वभाव ने हर बार उसे अकेला ही कर दिया. एक दिन सब कुछ छोड़-छाड़ कर वह बैरागन बन गई. 
     ...एमरा की इस पुरानी डायरी को पढ़ने के बाद पेरिना का दिल चाहा कि वह कम से कम एक बार किसी तरह एमरा से मिले, किन्तु इतने समय बाद, अब तो उसे यह भी पता नहीं था कि एमरा अब तक जीवित भी है या नहीं, और यदि है, तो वह कहाँ है.
     पेरिना के यह सोच कर ही रोंगटे खड़े हो गए कि बाबा मरते समय आश्रम के न रहने की बात पहले ही कह गया था. जब उसने इस डायरी और आश्रम के बारे में किन्ज़ान को बताया तो उसके दिल में भी यह सोच कर कसक उठी, कि उसे एक बार फिर जाकर बाबा से मिलना ही चाहिए था. लेकिन गया वक्त केवल अपनी याद ही वापस ला पाने की ताकत रखता है. वापस लौटना उसके वश में कहाँ? 
     इस डायरी को पढ़ लेने का एक असर ज़रूर हुआ कि पेरिना डेला की बेटियों को अब अपनी आँखों से कभी दूर नहीं करती थी. औरतों से बात न करने के बाबा के दृष्टान्त ने पेरिना के मन में डेला और दोनों बच्चियों के प्रति एक अदृश्य ममता का स्रोत गहरा दिया था...[जारी...] 
          

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