Saturday, April 14, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट [ भाग 38 ]

     उस दिन वाशिंगटन में धूप के तेवर कुछ नरम थे. जहाँ रात को नौ बजे दिन छिपता था, वहां शाम की शुरुआत ही कुछ धुंधले बादलों ने जल्दी कर डाली.
     व्हाइट-हॉउस   के सामने के   लम्बे-चौड़े लॉन पर टहलने वालों की आमदो-रफ्त रोजाना जैसी ही खुशनुमा थी. एक ओर युवकों और बच्चों के घेरे में तो जैसे  चहल-पहल का मेला ही लग रहा था. लोग कौतुहल से देख रहे थे, उस छोटे से ब्राज़ीलियन नस्ल के पप्पी को, जो लोगों के घेरे में घूम-घूम कर अपने पैरों पर खड़ा नाच रहा था. उसे किसी ने शायद शराब  पिला दी थी. वह ऐसे उन्माद में नाच रहा था कि उसके गले में पड़ा सुनहरा स्कार्फ किसी परचम की तरह हवा में लहरा रहा था.उसे देख कर ख़ुशी से ताली बजाने वालों में केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि खुद उस नन्हे कुत्ते की मालकिन-मॉम ग्रेटा भी शामिल थी, और उसके साथ न्यूयॉर्क से आयी उसकी मित्र भी. कुछ ही दूर पर खड़े एक फोटोग्राफर ने इस बेमिसाल मंज़र को कैमरे में कैद भी करना शुरू कर दिया था. फोटोग्राफर जिस कार्यक्रम को तस्वीरों में  उतारने वहां आया हुआ था, उसके शुरू होने में थोड़ा सा वक्त अभी बाकी था.
     किन्ज़ान अपनी होने वाली दुल्हन को लेकर अभी तक वहां पहुंचा नहीं था, बस उसी का सब को इंतज़ार था.अमेरिका के  राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने थोड़ी ही दूर पर एक बेहद खूबसूरत फव्वारे के समीप किन्ज़ान के कुछ मित्र भी इसी इंतज़ार में थे. डांस करता ब्राज़ीलियन डॉग और वे महिलाएं भी किन्ज़ान के निमंत्रण पर ही वहाँ पहुंचे थे.
     मुश्किल से दो मिनट ही गुज़रे होंगे कि फूलों से सजी एक आलीशान कार वहाँ आकर रुकी. उसे अर्नेस्ट चला रहा था. पीछे दूल्हा-दुल्हिन की पोशाक में किन्ज़ान और उसकी प्रेमिका बैठे थे. पलक झपकते ही आकर्षण का केंद्र  नन्हे कुत्ते की जगह कार से उतरा युगल हो गया. सभी ने उन्हें बधाई दी.
     फोटोग्राफर ने किन्ज़ान-दंपत्ति और उनके मेहमानों का एक यादगार फोटो उतारा जिसमें वे सभी एक साथ हवा में लयबद्ध उछाल लेक़र अपनी ख़ुशी के अतिरेक का इज़हार क़र रहे थे. वे शानदार क्षण-अक्स इस बात की सनद था, कि किन्ज़ान ने धरती से लेकर आकाश तक के जीवन-सफ़र में,मित्रों को हाज़िर-नाजिर जान क़र अपनी प्रेयसी के साथ दुनियां की तमाम दूरियां तय करने का संकल्प ले लिया. मखमली मुलायम लॉन  शेम्पेन से जैसे सींच दिया गया. किन्ज़ान के दमकते चेहरे पर नए जीवन का उन्माद रच गया.
     शाम को और गहराने का मौका दिए बिना ही वे सभी लोग तीन-चार  कारों में बैठ क़र एक लज़ीज़ रेस्तरां में रात्रि-भोज के लिए प्रस्थान क़र गए.वहीँ किन्ज़ान ने पेरिना से सब का परिचय कराया, जिसे वे पन्नी नाम से पुकारता था. एक खुशगवार शाम और दिल के नज़दीकी लोगों की उपस्थिति ने किन्ज़ान के तमाम  वे पल धो-पौंछ डाले, जिन्होंने पिछले दिनों तरह-तरह से उसका इम्तहान लिया था.देर रात मादक  आलम के बीच अर्नेस्ट ने गाड़ी को बफलो  की सड़क पर डाला, और मित्रों ने हाथ हिला क़र विदा ली...[जारी...] 
           

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