Tuesday, April 17, 2012

सूखी धूप में भीगा रजतपट [भाग 43 ]

      बाबा ने एकाएक पलट कर पीछे देख लिया. इससे किन्ज़ान भी हड़बड़ा गया.उसने बाबा को अभिवादन कर डाला. बाबा जोर से हंसा और पलट कर दरवाज़े के सामने की ओर आ गया.   बाबा के घूम कर सामने आते ही किन्ज़ान के साथ आया युवक पलट कर विपरीत दिशा में भागने लगा. लेकिन किन्ज़ान उसी तरह वहां खड़ा रहा. 
     ज़मीन के तल से छेद में झांककर अब पेरिना भी बाबा को देख पा रही थी. 
     बाबा लगभग छलांग लगा कर किन्ज़ान के सामने कूदा, और उसके एकदम पास आ गया.फिर बिजली की सी गति से बाबा ने किन्ज़ान की टी-शर्ट की जेब को पकड़ा और खींचने लगा. उसके दांत किसी पागल की तरह ही भिंचे हुए थे. किन्ज़ान अब घबरा गया और उसी युवक की तरह उसी दिशा में भागने लगा. युवक थोड़ी दूर पर खड़ा सारा नज़ारा देख रहा था. 
     किन्ज़ान के पीछे भागते हुए  बाबा ने अकस्मात् "पन्ना-पन्ना" चिल्लाना शुरू कर दिया.
     यह सुनते ही ज़मीन के छेद से झाँक रही पेरिना उत्तेजित हो गई और उसने तुरंत बूढ़ी महिला को बताया कि उसका पति किन्ज़ान उसे 'पन्नी' कह कर ही पुकारता है.वह उत्तेजना में यह भी भूल गई कि महिलाओं के लिए बाबा के सामने जाना निषिद्ध है, वह दौड़ कर बाबा के पास आने लगी. 
     लेकिन वहां तक आने के लिए उसे काफी घुमावदार सीढ़ियाँ उतरना ज़रूरी था.वह आगे बढ़ती, इस से पहले ही बूढ़ी महिला ने लपक कर उसकी कलाई पकड़ कर उसे रोक लिया. पेरिना बूढ़ी के हाथ की ताकत से दंग रह गई.
     उधर तेज़ी से दौड़ते किन्ज़ान को बाबा ने हांफ कर भागते हुए पकड़ लिया और तुरंत उसकी टी-शर्ट की जेब में हाथ डाल कर कुछ टटोलने लगा.इससे किन्ज़ान की घबराहट कुछ कम हुई और वह रुक कर खड़ा हो गया. 
     बाबा ने किन्ज़ान की जेब से जैसे ही हाथ बाहर निकाला, किन्ज़ान यह देख कर चौंका कि उसकी जेब से सुनहरी केसरिया इमली के आकार वाली मछली निकल कर बाबा के हाथ में आ गई. मछली मरी हुई थी. लेकिन किन्ज़ान डर से थर-थर कांपने लगा, क्योंकि इसी मछली को दूर फेंकने की कोशिश में किन्ज़ान ने भयंकर सपना देखा था. वह फिर भी मछली को फेंक नहीं सका था, और मछली गायब हो गई थी. अब बाबा के हाथ में न जाने कहाँ से वही मछली किन्ज़ान की जेब से निकल कर आ गई थी. 
     किन्ज़ान ने भी बाबा के 'पन्ना-पन्ना' चिल्लाने की आवाज़ सुनी थी और वह कुछ समझा नहीं था. इतना उसके दिमाग में भी कौंधा कि वह पेरिना को कभी-कभी प्यार से पन्नी कह कर पुकारता है. 
     अब वह युवक पलट कर  नज़दीक आया और बाबा का हाथ पकड़ कर उसे वापस उसकी गुफा की ओर ले जाने लगा. किन्ज़ान भी संयत होकर एक ओर खड़ा हो गया. 
     बूढ़ी महिला पेरिना को बताने लगी कि पन्ना भारत का एक कीमती पत्थर होता है, जिसे लोग चाव से अपने गहनों, जैसे अंगूठी आदि में जड़वा कर पहनते हैं.पेरिना इस जानकारी से बहुत खुश हुई. लेकिन बूढ़ी उसके इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे सकी, कि बाबा ने किन्ज़ान की जेब से मरी मछली कैसे निकाली, और मछली को हाथ में लेकर चिल्लाने का क्या प्रयोजन था. यह जिज्ञासा तो खुद बूढ़ी को भी थी...[जारी...]                 

No comments:

Post a Comment

सेज गगन में चाँद की [24]

कुछ झिझकती सकुचाती धरा कोठरी में दबे पाँव घूम कर यहाँ-वहां रखे सामान को देखने लगी। उसकी नज़र सोते हुए नीलाम्बर पर ठहर नहीं पा रही थी। उसके ...

Lokpriy ...