Saturday, August 25, 2012

घर शिफ्ट कर लिया नील आर्मस्ट्रोंग ने !

     उन्होंने 1969 में चाँद पर कदम रख दिया था। चाँद, जिसे देखकर सुहागिनें करवाचौथ के दिन सदियों से अपना व्रत खोलती रहीं हैं, चाँद, जिसे देख कर ईद मनती है। उस तिलिस्म को वे हकीकत में बदल आये थे। अन्तरिक्ष उनका घर था।
   वही आर्मस्ट्रोंग 82 साल की आयु में दुनिया से अब न आने की बात कह गए। अपने अंतिम वर्षों में उन्होंने कोई रोग भी झेला। लम्बे समय तक जिस पत्नी का साथ रहा था, उस से मनमुटाव के चलते अब वे अपनी दूसरी पत्नी के साथ थे। एक अत्यंत महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक होने के नाते उन्हें अपने परिवार और घरेलू मामलों के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता था। यहाँ तक कि  एक बार आपदा के कारण उनका अपना घर तहस-नहस हो गया, और उन्हें दूसरा घर बनाना पड़ा। इस नए आशियाने के निर्माण की बागडोर पूरी तरह उनकी पत्नी ने ही संभाली, और उन पर यह आरोप भी लग गया कि  वे "अपने" परिवार के लिए महफूज़ और मज़बूत घर नहीं बना पायेंगे। घर नष्ट हो जाने के दिन बच्चों का  स्कूल से लौटने पर घर के बाहर पड़े फर्नीचर पर बैठना और पड़ौस में जाकर भोजन करना उन्हें भीतर तक झकझोर गया था। लेकिन बच्चों ने इस अपमान भरी आपदा की भरपाई उस दिन कर ली, जब उन्हें अपने "चाँद-विजयी" पिता के साथ दुनिया भर के सम्मान समारोहों में शिरकत करने का मौका मिला।
     खैर, उनके तलवों की स्पन्दन-भरी खलिश ने चाँद के बदन पर भी आज हलकी सी सुरसुरी तो ज़रूर छोड़ी होगी। अब वे अन्तरिक्ष के जिस नक्षत्र पर जा बैठे, अगर चाँद को पता चले, तो शायद वह हमें भी बताये ! 

4 comments:

  1. पहली दफ़ा गए थे चाँद पर,
    कल फिर निकल लिए उसी तरफ....
    हमारी यादों में रह गए,,,,
    धरती को सूना कर..:(
    भावभीनी श्रद्धांजलि...

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  2. बहुत खूब सर जी...

    सबसे पहले गए थे चाँद पर...
    कल फिर चल दिए उसी तरफ...
    हमारी यादों में रह गए...
    धरती को सूना कर.......!!!
    इनके ऊपर मेरा recent post-"चाँदनी रातों को याद आऐगें..."
    आभार..!

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  3. Abhar to main manta hoon tumhara, tum purani peedhee ka aadar karna aur unke sanskaar lena bahut tezi se seekh rahe ho!

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  4. दुखद समाचार रहा। सोचता हूँ कि जीवन की नश्वरता कैसे हर दूसरी चीज़ पर भारी पड़ जाती है। मेरी श्रद्धांजलि! इधर एक दूसरे आर्मस्ट्रॉंग दूसरे ही कारणों से चर्चा में आ गये।

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