Wednesday, January 25, 2012

म्यूजिकल चेयर की तरह न खेला जाये "भारत रत्न"

मकर संक्रांति पर आकाश में बहुत पतंगें उड़ती हैं. २६ जनवरी को एक बच्चे से किसी ने पूछा- बेटा आज स्कूल नहीं गए? बच्चे ने कहा- अंकल, आज नेताओं की संक्रांति है न, इसलिए छुट्टी है. अंकल बच्चे की बात का मतलब समझ कर भी हंस न सके.
आज गणतंत्र दिवस है. नेता गण जगह-जगह झंडा फहरा रहे हैं. अखबारों ने 'पद्म पुरस्कारों' की घोषणा की है. खबर है कि 'भारत रत्न' जैसा सर्वोच्च पुरस्कार पिछले कई सालों की तरह इस बार भी किसी को नहीं दिया गया. साथ ही यह भी बताया गया है कि खेल मंत्रालय ने भारत रत्न पुरस्कार के लिए ध्यानचंद, अभिनव बिंद्रा और तेनसिंग के नामों की अनुशंसा की है.
किसके लिए पुरस्कार माँगा जा रहा है, किसके लिए सिफारिश की जा रही है, किस पर विचार नहीं हो रहा, यह सब बातें यदि पारदर्शिता की सीमा में रहेंगी तो इन पुरस्कारों की गरिमा को ध्वस्त होते देर नहीं लगेगी. देश का सर्वोच्च सम्मान कोई फुटबाल का मैच नहीं है जिसमें खिलाडी बॉल लेकर भागते दिखाई दें.इसके लिए तो एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय समिति स्वतः विचार करके शालीनता से नाम घोषित करे तभी इसकी सार्थकता है. पिछले दिनों सचिन व ध्यानचंद का नाम लेकर जिस तरह अभियान चले उन्हें गरिमामय नहीं कहा जा सकता. ये दोनों ही नाम अपने आप में चमकते हुए नक्षत्रों की तरह हैं, इन्हें किसी की सिफारिश की ज़रुरत नहीं हो सकती. बिना प्रमाण-पत्र के भी ये भारत रत्न ही हैं.     

4 comments:

  1. bilkul sahi kaha hai aapne.main poorntah sahmat hoon.

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  2. aapko bahut dhanywad.aisi pratikriyayen hi un logon ko kuchh sharminda karke rok sakengi jo sochte hain ki sachin ke liye puraskar maang kar ve mahaan maan liye jayenge.

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  3. पारदर्शिता और निष्पक्षता तो भारत के लिये प्रवासी पक्षी हैं। कभी-कभार दिखते हैं तो महंगे बिकते हैं, फिर पका लिये जाते हैं।

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  4. aapki baat bilkul sahi hai, yahan din men chaand aur raat ko suraj nahi nikalta yahi ganimat hai.

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