Monday, January 30, 2012

कुदरत बोलती है-यह विज्ञानं है, अंधविश्वास है या संयोग है ?

कहते हैं कि कुदरत आने वाले समय का संकेत किसी न किसी रूप में देने की कोशिश करती है. कुछ लोग इन संकेतों को समझ लेते हैं, तो कुछ इनकी अनदेखी कर देते हैं. कुछ इन्हें महज़ इत्तफाक कहते हैं.
एक लड़की कह रही है- नैना बरसे रिम-झिम रिम-झिम...
उस लड़की से एक लड़का कहता है- छलके तेरी आँखों से शराब और ज्यादा
लड़की कहती है- चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है, आँखों में सुरूर आ जाता है,जब तुम मुझे अपना कहते हो...
लड़का कहता है- नैनों वाली ने, हाय मेरा दिल लूटा
लड़की  कहती है- नैनों में बदरा छाये, बिजली सी चमके हाय...
लड़का कहता है-याद है मुझको मेरी उम्र की पहली वो घड़ी, जब तेरी आँखों से कोई जाम पिया था मैंने 
लड़की कहती है- मदिरा में डूबी अँखियाँ, चंचल हैं दोनों सखियाँ...
....और फिर एक दिन अचानक दो सुपरस्टारों की शूटिंग रुक जाती है. बताया जाता है कि लड़की आँखों के इलाज के लिए विदेश चली गई है. लौट के आती है तो फिल्मों को अलविदा कह देती है. घर से बाहर आना-जाना बंद हो जाता है, क्योंकि आँखों पर हर समय लगा रहने वाला काला चश्मा उसे बाहर जाने से रोकता है. 
किसी समय की शिखर अभिनेत्री "साधना" की यह कहानी, कहानी नहीं हकीकत है.  

2 comments:

  1. सार्थक और सामयिक प्रस्तुति, आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग "meri kavitayen" पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा /

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  2. dhanywad.aapki kavitaon ka rasaswadan awashya karna chahunga.

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