Saturday, December 17, 2011

सूडान और उत्तर प्रदेश की प्रसव पीड़ा का साल

जब २०११ शुरू हुआ था तो अफ्रीका के सबसे बड़े देश सूडान ने सबका ध्यान खींचा था. इस बात पर जनता की रायशुमारी की जा रही थी कि क्या सूडान से दक्षिणी सूडान को अलग करके, एक अलग देश का दर्ज़ा दे दिया जाय.चाहे जन्म न हो, पर ऐसी ही प्रसवपीड़ा भारत का उत्तर प्रदेश राज्य भी झेल रहा है.
उत्तर प्रदेश में तो शीघ्र ही चुनाव भी होने वाले हैं. इन चुनावों में सबसे ज्यादा खींच-तान चार दलों के बीच ही है. सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस.चारों का उत्साह और दम-ख़म देख कर ऐसा लग रहा है कि कहीं चारों ही प्रदेश के चार टुकड़े करके, एक-एक टुकड़ा न ले उड़ें.वैसे यह स्थिति काल्पनिक ही है, पर यदि ऐसा हो जाये तो ये चार राज्य चार देशों जैसे ही हो जायेंगे.
कोई खिलौना अपनी इच्छा से तो टूटना नहीं चाहता. खेलने वाले बच्चे ही उसे तोड़ देते हैं.
इन चुनावों में मुद्दे भी चार ही हैं- विदेशों में जमा काला धन,नोट से वोट, गाँव-गाँव की पद-यात्रायें और भ्रष्टाचार.
संसद ने चार दिन में कुछ नहीं किया तो जैसे क्रिसमस में सांताक्लॉज़ घर-घर  पहुंचेंगे वैसे ही चुनावों में  अन्ना हजारे भी.यह डर सभी को साल रहा है-
          खादी  लपेट-लपेट के  घूमत, वोटन के लिए  नेता  बेचारे
          रोटी भी छोड़ के, बोटी भी छोड़ के, पैदल डोल रहे मारे-मारे
          लूट  के  ढेर के ढेर यहाँ से, धरे  परदेस  में  नोट  करारे
          भ्रष्टाचार की  तान  उठाके, ये  आये  कहाँ  से  अन्ना हजारे?     

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