Wednesday, December 7, 2011

कपिल सिब्बल, गिरिजा व्यास, प्रणब मुखर्जी और अन्ना हजारे

क्या आपको इन नामों में कोई समानता नज़र आ रही है?
नहीं आ रही?
चलिए, एक 'क्लू' के बाद शायद आप बता पायें. क्लू यह है कि समानता केवल आज-आज है, कल का कोई भरोसा नहीं, हो सकता है कि कल ये सब फिर आपको अलग-अलग दिखाई दें.
समानता यह है कि ये सभी आज के न्यूज़ मेकर हैं.
आपको लगेगा, कि यह कौन सी खास बात है? ये बड़े-बड़े लोग हैं, न्यूज़ तो रोज़ ही बनाते हैं.
लेकिन खास बात यह है, कि इन सभी ने आज जो समाचार बनाया है, वह महात्मा गाँधी, भगवान महावीर, गौतम बुद्ध या मदर  टेरेसा की शैली में, बेहद शांति, अहिंसा, त्याग, सहिष्णुता और समर्पण सहित बनाया है. आइये, अब इनके 'बनाये'समाचारों को देखें-
बेहद सादगी और सत्यता से अन्ना हजारे ने स्वीकार किया है कि शरद पवार के "एक ही", उनके दिल की आवाज़ थी. बाद में जो कुछ उन्होंने कहा, वह दुनियादारी और शिष्टाचार का तकाजा था.
गिरिजा व्यास आज ख़बरों में हैं तो इसलिए कि उठाईगीरे केवल भारत में नहीं हैं, बल्कि विश्व के संपन्न और विकसित देशों में भी हैं, कुल मिला कर छीना-झपटी एक "मानव अधिकार" है, गिरिजा जी ने यह बात विश्व मानव अधिकार दिवस के चंद दिनों पहले सिद्ध की, वे जर्मनी के बर्लिन गईं थीं.
हिंदी में 'उगल कर निगल लेना' कोई पॉपुलर मुहावरा नहीं हैं, लेकिन यदि पॉपुलर मुहावरे में बात की जाएगी तो प्रणव दा के साथ-साथ सरकार और संसद की भी किरकिरी होगी, लिहाज़ा आज के न्यूज़-मेकर प्रणव मुखर्जी को सुषमा स्वराज की बधाई.
अब बचे कपिल सिब्बल.आज एक बड़ी खबर उनके नाम से भी है.
एक बार एक आदमी बीच चौराहे पर बैठा, एक के बाद एक शीशे फोड़ रहा था.एक लड़के से रहा नहीं गया, पूछ बैठा- बाबा, इस तरह कांच क्यों फोड़ रहे हो? बाबा बोला- बेटा, इन सभी कांचों में मेरा मुंह काला दिखाई दे रहा है.
लड़का बोला- तो जाकर अपना मुंह धो आओ, कांच क्यों फोड़ते हो? बाबा आश्चर्य से  बोला, बच्चा समझदार है.
ऐसा कोई बच्चा सिब्बल जी को भी मिल जाता तो "सोशल साइट्स" पर लगाम कसने की ज़रुरत नहीं पड़ती.  
   

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