Friday, December 16, 2011

रशिया यात्रा में मंत्र देने या मंत्र लेने की संभावनाएं

जब दो बड़े नेता मिलते हैं तो दुनिया उत्सुकता से देखती है. लोगों में यह सामान्य जिज्ञासा होती है कि क्या बातें कीं. ऐसे देशों के कान पहले खड़े होते हैं जो दोनों से सम्बन्ध रखते हैं. जो दोनों से, या किसी एक से भी दुश्मनी रखते हैं, उनकी तो नींद थोड़ी देर के लिए उड़ ही जाती है.
पर मास्को में मनमोहन को देख कर ऐसा कहीं कुछ नहीं होगा.
फिलहाल पुतिन की भी स्टार इमेज नहीं है. अलबत्ता दोनों में एक समानता ज़रूर है कि दोनों से ही उनके देश की जनता अघाई हुई है. एक जगह समस्या यह है कि ये सब क्या हो रहा है, तो दूसरी जगह परेशानी यह है कि कुछ होता क्यों नहीं?
रशिया की स्थिति अभी यह है कि एक रास्ता छोड़ तो दिया गया है, पर दूसरा अभी पकड़ा नहीं गया. बल्कि कुछ लोग तो इस बात के भी पक्षधर हैं, कि देश अपनी पुरानी सोच पर ही लौटे.खैर, वह एक सम्पन्न और समर्थ देश है, कुछ देर रुक कर सोचने से उसका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है.
यदि हम बात भारत की करें, तो कहा जा सकता है कि हमारी जन्मकुंडली के ग्रह हमारी चाल भी तय करते हैं, और हमारा गंतव्य भी. हाँ, हमारी जन्मकुंडली हम खुद तय करते हैं. उसकी भी एक निश्चित मियाद है. उसमें अभी समय शेष है.
रशिया से कुछ माल हमारे प्रधानमंत्री बंद गठरी में ला सकते  हैं तो कुछ खुले-आम भी. बस देखना यह है कि उड़ती चिड़िया के पर गिनना चीन को आता है या नहीं.  

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